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(लीड) सच्चा शासक वही, जो अपनी जनता के दुख-दर्द को खुद महसूस करे : भैय्याजी जोशी

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(लीड) सच्चा शासक वही, जो अपनी जनता के दुख-दर्द को खुद महसूस करे : भैय्याजी जोशी


नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और मार्गदर्शक सुरेश भैय्याजी जोशी ने शुक्रवार को यहां कहा कि श्रीराम ने 14 साल जंगलों में बिताए ताकि वे आम जनमानस और पिछड़े समाज की समस्याओं को करीब से देख सकें। उसके बाद, 'राम-राज्य' की नींव रखी। उनका जीवन सिखाता है कि नेतृत्व का अर्थ आदेश देना नहीं बल्कि समाज के प्रति समर्पित होना है। जब तक शासक जनता के संघर्ष को नहीं पहचानता, वह न्याय नहीं कर सकता।

जोशी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित तीन दिवसीय अयोध्या पर्व के उद्घाटन समारोह में कहा, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों पर आधारित राष्ट्र का पुनर्निर्माण ही आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। सच्ची राम भक्ति केवल नाम जप में नहीं बल्कि उनके पदचिह्नों पर चलने और उनके उच्च नैतिक मूल्यों को अपने चरित्र में उतारने में है। प्रभु राम का जीवन हमें सिखाता है कि महान कार्यों के लिए केवल साधन या बौद्धिक चातुर्य की आवश्यकता नहीं होती बल्कि दृढ़ संकल्प और सेवा भाव सर्वोपरि है।

भैय्याजी ने कहा कि 'अयोध्या के राम' कहते हैं लेकिन वर्तमान समय और संकेत यह दर्शाते हैं कि यह 'राम की अयोध्या' है। यह अयोध्या पर्व केवल आनंदोत्सव नहीं है बल्कि भविष्य के लिए दिशा-दर्शन और साहस प्रदान करने वाला पर्व है। असली प्रश्न अब यह है कि हमारे हृदय में रामलला कब विराजमान होंगे उन्होंने हनुमान की भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि वानर के रूप में एक सामान्य प्राणी को हाथ में लेकर उनके द्वारा ईश्वरीय कार्य करवाया है, यह एक सामान्य बात नहीं है। ये संकेत देता है भविष्य की पीढ़ी को, हम सबको, कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी इस देश के लिए, समाज के लिए श्रेष्ठ कार्य करने का साधन बन सकता है। साधन देने वाला श्रेष्ठ है तो साधन लेने वाला भी श्रेष्ठ बन सकता है। यही तो हनुमान और राम की कथा है, इसकी महिमा है। यही कुशलता का बीजारोपण है।

जोशी ने कहा कि अगर भगवान राम को हम समझ पाए, तो मैं समझता हूं कि हम सब उस राम काज करने के श्रेष्ठ साधन बन सकते हैं। एक ही शर्त है, हम सबके मन में उसी प्रकार के राम की भक्ति चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में पर्यटन स्थल के स्थान पर यह एक श्रद्धा का और ऊर्जा का केंद्र बने यह देश की, समाज की, भारत की, हम सबकी आवश्यकता है। इसी दृष्टि से भविष्य की अयोध्या की ओर देखना चाहिए। मैं समझता हूं कि अयोध्या का पर्व इस प्रकार के चिंतन, मंथन, विचार-विमर्श का केंद्र बने, इस दिशा में इस प्रकार का अयोध्या बनाने में एक सहयोगी यह पर्व बनेगा। इस पर्व को केवल हम एक श्रद्धा के और राम के प्रति भक्ति का कारण न मानते हुए, भविष्य के राष्ट्र निर्माण का पर्व मानें। इसी संकल्प को लेकर हम चलें। उस दिशा में हम सब लोग विचार करें, सोचें, आचरण करें, संकल्पबद्ध हों और आगे चलने का पुरुषार्थ करें।

जोशी ने कहा कि देश में 100 वर्ष पूर्व एक संगठन बना था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके 100वें वर्ष में रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण हुआ, यह एक सुखद संयोग है। उन्होंने कहा कि राममंदिर का निर्माण देश का इतिहास लिखने की शुरुआत का एक पृष्ठ है। अयोध्या से देश बनने की प्रक्रिया शुरू हुई है। राममंदिर का निर्माण केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं है, राष्ट्र निर्माण का शुभारम्भ है। अयोध्या ईश्वरीय शक्ति का केन्द्र है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके वर्तमान से अधिक उसकी पहचान और सभ्यतागत जड़ों में निहित होती है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के विकास में परंपरा और आधुनिकता को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगा। राष्ट्र का भविष्य उसके अतीत से अलग नहीं होता। यदि हम अपनी जड़ों को समझते हैं और उन्हें आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं तब हम न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनते हैं बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त होते हैं।

उन्होंने आग्रह किया कि युवा पीढ़ी और भविष्य की पीढ़ी गुलामी की मानसिकता को पूर्णतया समाप्त कर अपनी सनातन संस्कृति और भारत के गौरव को आगे बढ़ाने के लिए काम करे।

अयोध्या के श्री मणिरामदास छावनी के महंत कमल नयन दास ने कहा कि जब भी देश पर विपत्ति आती है तब संत और महापुरुष आगे आते हैं। आज हमें फिर से भगवान राम के आदर्शों की आवश्यकता है ताकि हम एक समरस समाज और रामराज्य की स्थापना कर सकें। हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र है तो हम हैं, हमारी अस्मिता है, हमारा धर्म है, हमारा कर्म है, सब कुछ है। राष्ट्र की रक्षा करना हमारा पुनीत कर्तव्य है। राष्ट्र की रक्षा करने के लिए हमें इस भेदभाव को दूर करना होगा। भगवान राम के आदर्श को जन-जन तक पहुंचाना होगा। तभी हम सुखी होंगे, समृद्धशाली होंगे, राष्ट्र संपन्न होगा और आनंद की प्राप्ति होगी।

राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि अयोध्या केवल एक वाक्य नहीं बल्कि एक दर्शन है। यह केवल एक स्थान नहीं बल्कि एक विचार और आदर्श है।

आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि यह पर्व आने वाले समय में पूरे विश्व को अपनी ऊर्जा से अपनी प्रेरणा से आलोकित करता रहेगा।

समारोह में मुख्य अतिथियों ने 'अयोध्या पर्व स्मारिका' और कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण किया। यह स्मारिका केवल एक प्रकाशन नहीं बल्कि इस पूरे आयोजन की भावना, वैचारिक गहराई और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत दस्तावेज है।

तीन से पांच अप्रैल तक चलने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम अयोध्या पर्व का आयोजन आईजीएनसीए और श्री अयोध्या पर्व न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस आयोजन का उद्देश्य अयोध्या की ऐतिहासिक गरिमा, लोक परंपराओं और आधुनिक विकास को एक मंच पर लाना है। परिसर में फोटोग्राफी प्रदर्शनी और रामकथा मर्मज्ञ दिवंगत पंडित रामकिंकर उपाध्याय की स्मृति में आयोजित की गई, जिसका विषय रामोत्सव पर आधारित है। इसके विजेताओं को स्मृति चिह्न और धनराशि देकर सम्मानित किया गया।

निर्णायक मंडल द्वारा निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के बाद 'रामोत्सव' और 'चित्रांजलि' (फेस्टिवल ऑफ इंडिया) फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं के 3-3 विजेताओं को सम्मानित किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस प्रतियोगिता का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और विविधता को एक फ्रेम में प्रस्तुत करना था। इसमें देशभर से लगभग 3,500 हजार से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं।

आज सुबह 11 बजे ‘भविष्य की अयोध्या-नगर योजना’ विषय पर चर्चा की गई। इसमें श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अन्य विशेषज्ञ अयोध्या के आधुनिक स्वरूप पर विचार साझा किए। शाम 6 बजे कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य प्रस्तुतियां दीं। इस कार्यक्रम में श्री मणिरामदास छावनी, अयोध्या के महंत कमल नयन दास, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक एवं मार्गदर्शक सुरेश भैयाजी जोशी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री राजकुमारी दीया कुमारी, पूर्व मंत्री एवं राज्यसभा सांसद अशोक वाजपेयी, आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी सहित अन्य हस्तियां मौजूद रहे। इसमें संत-महात्माओं, विद्वानों, नीति-निर्माताओं, कलाकारों एवं जनप्रतिनिधियों की व्यापक सहभागिता होगी। इस कार्यक्रम के संयोजक फैज़ाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी