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अयोध्या के विकास में परंपरा व आधुनिकता को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगाः मनोज सिन्हा

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अयोध्या के विकास में परंपरा व आधुनिकता को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगाः मनोज सिन्हा


नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके वर्तमान से अधिक उसकी पहचान और सभ्यतागत जड़ों में निहित होती है।

मनोज सिन्हा ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित तीन दिवसीय अयोध्या पर्व के उद्घाटन समारोह में कहा, “अयोध्या के विकास में परंपरा और आधुनिकता को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगा। राष्ट्र का भविष्य उसके अतीत से अलग नहीं होता। यदि हम अपनी जड़ों को समझते हैं और उन्हें आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं तब हम न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनते हैं बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त होते हैं।”

तीन से पांच अप्रैल तक चलने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम अयोध्या पर्व का आयोजन आईजीएनसीए और श्री अयोध्या पर्व न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस आयोजन का उद्देश्य अयोध्या की ऐतिहासिक गरिमा, लोक परंपराओं और आधुनिक विकास को एक मंच पर लाना है।

उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि अयोध्या को केवल एक तीर्थ स्थान या एक भौगोलिक स्थान के रूप में देखने की आवश्यकता नहीं है बल्कि अयोध्या सभ्यता, चेतना और आत्मा का एक शाश्वत स्रोत है। अयोध्या हमें धैर्य की भी प्रेरणा देता है और अनुभव के साथ-साथ अनुभूति पर भी बल देता है। जब हम अयोध्या का नाम लेते हैं तब हम केवल प्रभु श्री राम के नगर का उल्लेख नहीं करते बल्कि हम उस चेतना को पुकारते हैं जो प्रभु राम का आशीर्वाद है जिसने मानव सभ्यता को दिशा देने और उसे अर्थ प्रदान करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए अयोध्या एक ऐसा केंद्र बन सकता है जहां से हमारी सभ्यता का संदेश संपूर्ण विश्व तक पहुंचाया जा सके। पृथ्वी पर अनेक नगर, अनेक साम्राज्य और अनेक संस्कृतियां आईं और विलीन हो गईं लेकिन अयोध्या समय के प्रवाह से परे बराबर खड़ा रहा है। अयोध्या में सभ्यता ने न केवल जन्म लिया था बल्कि वहां सभ्यता ने स्वयं को पहचानने का काम किया था और हमारे पूर्वजों ने जीने के साथ-साथ जीवन के अर्थ को समझने का प्रयास किया। उन्होंने आग्रह किया कि युवा पीढ़ी और भविष्य की पीढ़ी गुलामी की मानसिकता को पूर्णतया समाप्त कर अपनी सनातन संस्कृति और भारत के गौरव को आगे बढ़ाने के लिए काम करे।

अयोध्या के श्री मणिरामदास छावनी के महंत कमल नयन दास ने कहा कि जब भी देश पर विपत्ति आती है संत और महापुरुष आगे आते हैं। आज हमें फिर से भगवान राम के आदर्शों की आवश्यकता है ताकि हम एक समरस समाज और रामराज्य की स्थापना कर सकें। हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र है तो हम हैं, हमारी अस्मिता है, हमारा धर्म है, हमारा कर्म है, सब कुछ है। राष्ट्र की रक्षा करना हमारा पुनीत कर्तव्य है। राष्ट्र की रक्षा करने के लिए हमें इस भेदभाव को दूर करना होगा। भगवान राम के आदर्श को जन-जन तक पहुंचाना होगा। तभी हम सुखी होंगे, समृद्धशाली होंगे, राष्ट्र संपन्न होगा और आनंद की प्राप्ति होगी।

राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि अयोध्या केवल एक वाक्य नहीं बल्कि एक दर्शन है। यह केवल एक स्थान नहीं बल्कि एक विचार और आदर्श है। चौरासी कोस की परिक्रमा, गुप्तार घाट, कनक भवन, नागेश्वर नाथ जैसे अनेक धरोहर स्थल इस महान विरासत के प्रतीक हैं। यह अयोध्या पर्व हमारी अवधी संस्कृति, लोक नृत्य, शास्त्रीय संगीत और कुटीर उद्योगों को भी सशक्त मंच दे रहा है। अवधहाट में ग्रामीण कारीगरों का योगदान हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती दे रहा है। संस्कृति हमारी पहचान, विकास हमारी उड़ान के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि हम प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करें। उन्होंने युवाओं से भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों से अयोध्या पर्व का यह आयोजन कला केंद्र के परिसर में हो रहा है। इस आयोजन के माध्यम से कला केंद्र की पूरी की पूरी भूमि और पूरी की पूरी मेधा एक तरह से ऊर्जावान होती है और प्रेरणा से आप्लावित होती है। उन्होंने कहा कि यह पर्व आने वाले समय में पूरे विश्व को अपनी ऊर्जा से अपनी प्रेरणा से आलोकित करता रहेगा।

परिसर में फोटोग्राफी प्रदर्शनी और प्रतियोगिता दिवंगत महेंद्र चौधरी की स्मृति में आयोजित की गई, जिसका विषय रामोत्सव पर आधारित है। इसके विजेताओं को स्मृति चिह्न और धनराशि देकर सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी