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'लोकतंत्र विजय दिवस’ कार्यक्रम राष्ट्र की लोकतांत्रिक स्मृति का जीवंत रूप है: इंद्रेश कुमार

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'लोकतंत्र विजय दिवस’ कार्यक्रम राष्ट्र की लोकतांत्रिक स्मृति का जीवंत रूप है: इंद्रेश कुमार


नई दिल्ली, 21 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक डॉ इंद्रेश कुमार ने कहा कि 'लोकतंत्र विजय दिवस’ कार्यक्रम राष्ट्र की लोकतांत्रिक स्मृति, संघर्षशील चेतना और कृतज्ञता का जीवंत रूप है।

इंद्रेश कुमार ने यह बात शनिवार को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी सभा कक्ष में लोकतंत्र सेनानी संघ एवं जेपी सेनानी संघ की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ कार्यक्रम में कही। यह दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में आपातकाल के अंत और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

मुख्य अतिथि के रूप में इंद्रेश ने कहा कि जहां स्वतंत्रता संग्राम के कई आंदोलन हिंसा की भेंट चढ़ गए वहीं आपातकाल के विरुद्ध लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष पूर्णतः अनुशासित और अहिंसक रहा। उन्होंने इसे नैतिक ऊँचाई और संवैधानिक प्रतिबद्धता का अद्वितीय उदाहरण बताया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय सलाहकार अश्विनी कुमार चौबे ने जेपी आंदोलन को याद करते हुए कहा कि आपातकाल केवल राजनीतिक दमन नहीं बल्कि एक परिवार की सत्ता बचाने के लिए संविधान पर किया गया प्रहार था। उन्होंने मांग की कि शिक्षा बोर्डों के पाठ्यक्रम में आपातकाल पर एक पृथक अध्याय जोड़ा जाए ताकि भावी पीढ़ी जागरूक होकर लोकतंत्र के महत्व और उसकी रक्षा के संघर्ष को समझ सकें।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं बल्कि लोकतांत्रिक भारत की आत्मा का सम्मान है। इतिहास तभी जीवित रहता है जब समाज अपने संघर्षशील अध्यायों को स्मृति, शिक्षा और संस्थागत सम्मान तीनों रूपों में सुरक्षित रखे।

पूर्व सांसद कैलाश सोनी ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, वास्तव में लोकतंत्र की प्रतिष्ठा का सम्मान है।

पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह ने यूथ फॉर डेमोक्रेसी जैसे प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया ताकि युवाओं में लोकतांत्रिक जागरूकता बनी रहे।

इसके अलावा देशभर से जुटे लोकतंत्र सेनानियों और मीसाबंदियों ने एक स्वर में मांग की है कि आपातकाल के इतिहास को शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना आवश्यक है कि भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए किस तरह का संघर्ष और दमन सहा गया था।

इस मौके पर दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन ढींगरा और दिल्ली प्रदेश के महामंत्री राजकुमार सपरा सहित देश के लगभग सभी प्रांतों से आए लोकतंत्र सेनानी, विभिन्न राज्यों के पदाधिकारी तथा लोकतंत्र-संघर्ष की परंपरा से जुड़े 500 से अधिक लोकतंत्र सेनानी और मीसाबंदी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी