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छठी पीढ़ी के 'फाइटर जेट प्रोजेक्ट' में फ्रांस के साथ शामिल होगा भारत

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छठी पीढ़ी के 'फाइटर जेट प्रोजेक्ट' में फ्रांस के साथ शामिल होगा भारत

- पार्लियामेंट्री पैनल ने रक्षा मंत्रालय से विकसित एयरक्राफ्ट खरीदने का रोडमैप मांगा

नई दिल्ली, 08 अगस्त (हि.स.)। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के इंजनों के लिए जूझ रहे भारत ने फ्रांस के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम में शामिल होने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसका मकसद घरेलू पांचवीं पीढ़ी के एएमसीए प्रोजेक्ट के साथ-साथ भविष्य के हवाई युद्ध के गैप को भरना है। फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (एफसीएएस) को फ्रांस सरकार लीड कर रही है। पार्लियामेंट्री पैनल ने रक्षा मंत्रालय से ऐसे एयरक्राफ्ट खरीदने का रोडमैप मांगा है।

रक्षा मंत्रालय ने छठी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट के मुद्दे पर डिफेंस पर स्टैंडिंग कमिटी को बताया है कि भारत ने फ्रांस के नेतृत्व वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम यानी छठी जेनरेशन के फाइटर एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल करने के लिए ठोस कोशिशें शुरू की हैं। फ्रांस की अगुवाई में इस कार्यक्रम का मकसद अगली पीढ़ी के फाइटर जेट को युद्ध के आसमान में उतारना है, जो कॉम्बैट क्लाउड के ज़रिए रिमोट कैरियर स्वार्मिंग ड्रोन से जुड़ा हो। यह एक बराबर साझेदारी वाला कार्यक्रम है, जिसका मकसद ऑपरेशनल तैयारी को टारगेट करना है।

हालांकि, भारत अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को अलग से बना रहा है, इसलिए भारत ने फ्रांस के नेतृत्व वाले एफसीएएस फ्रेमवर्क को प्राथमिकता देते हुए इंटरनेशनल फ्रेमवर्क का मूल्यांकन करने और उनके साथ तालमेल बिठाने के लिए औपचारिक रूप से यह कदम उठाया है। इस कार्यक्रम में भागीदारी का मकसद छठी पीढ़ी के जरूरी बिल्डिंग ब्लॉक्स जैसे कि मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (लॉयल विंगमैन ड्रोन), एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कॉम्बैट क्लाउड नेटवर्किंग और हाई-थ्रस्ट प्रोपल्शन तक जल्दी पहुंच बनाना है।

संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में रक्षा पर पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने भविष्य के वायु केंद्रित युद्ध में भारत की एयर डोमेन क्षमताएं बढ़ाने के लिए छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट का विकास कार्यक्रम आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। कमेटी को बताया गया है कि छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए यूके, इटली, जापान, फ्रांस और जर्मनी एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (एफसीएएस) को फ्रांस सरकार लीड कर रही है। इसलिए भारतीय वायु सेना इस एफसीएएस कार्यक्रम में शामिल होगी, ताकि भारत पिछड़ने के बजाय एडवांस्ड एयरक्राफ्ट के विकास में दुनिया के साथ रहे।

दरअसल, फाइटर एयरक्राफ्ट को जनरेशन में बांटने से सैन्य रणनीतिकार, इंजीनियर और पॉलिसी बनाने वालों को भविष्य की युद्ध क्षमता के लिए सही लक्ष्य तय करने में मदद मिलती है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों ने स्टेल्थ और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर शुरू किया, तो अब छठी पीढ़ी को एक बड़ी छलांग लगाकर गेम-चेंजिंग टेक्नोलॉजी को शामिल करना होगा। यह अलग-अलग देशों के कार्यक्रमों के बीच एक स्तर पर तुलना करने में भी मदद करेगा, ताकि पारदर्शिता के साथ-साथ वैश्विक सैन्य संतुलन भी बना रहे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) छठी पीढ़ी के फाइटर्स की रीढ़ होगी, जो पायलट के फैसले लेने की क्षमता को बढ़ाकर और मुश्किल कामों को आसान करके हवाई लड़ाई को बदल देगी।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम