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केंद्र का ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव में पंचायतों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

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केंद्र का ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव में पंचायतों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर


नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बुधवार को ‘सुजल ग्राम संवाद’ का 12वां संस्करण आयोजित किया। इसमें ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव में ग्राम पंचायतों की भूमिका, जलस्रोतों के संरक्षण और उपयोगकर्ता शुल्क के माध्यम से व्यवस्था को टिकाऊ बनाने पर जोर दिया गया। संवाद में पांच ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीणा की अध्यक्षता में आयोजित संवाद में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मीणा ने कहा कि पंचायतों को जल सेवा आकलन और स्वच्छ सेवा आकलन के जरिए सेवाओं की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के अनुदान का प्रभावी उपयोग करने और जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव के लिए उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की घालियां ग्राम पंचायत ने बताया कि जल जीवन मिशन से पहले ग्रामीण बोरवेल और टैंकरों पर निर्भर थे, लेकिन अब पंचायत के सभी छह गांवों में नियमित जलापूर्ति हो रही है। महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांचने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की इतोरे पंचायत में प्रत्येक परिवार से 62 रुपये मासिक उपयोगकर्ता शुल्क लिया जा रहा है। जिले के उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को नल से जल की सुविधा से जोड़ा गया है।

दादरा एवं नगर हवेली की अथाल पंचायत ने पाइप से जलापूर्ति के बाद स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की जानकारी दी। मिजोरम के खावजावल जिले की सियालहॉक पंचायत में प्रत्येक परिवार 150 रुपये मासिक शुल्क देता है, जिसका उपयोग जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव में किया जाता है। नगालैंड के जुन्हेबोटो जिले की नाथा न्यू विलेज पंचायत ने बताया कि सभी घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध हैं। समुदाय ने जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जलग्रहण क्षेत्र में पौधरोपण भी किया है।

समापन संबोधन में सोअन ने कहा कि पेयजल योजनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए जल स्रोतों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने ग्राम पंचायतों और जिला प्रशासन से वीबी-जी राम जी, वित्त आयोग के अनुदान और राज्य सरकार की योजनाओं के संसाधनों का समन्वित उपयोग करते हुए ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के तहत जल संरक्षण, पारंपरिक जल निकायों के पुनर्जीवन और जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव की कार्ययोजना बनाने का आग्रह किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर