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भाषाई विविधता कमजोरी नहीं, देश की सबसे बड़ी ताकत और सांस्कृतिक पूंजी हैः अमित शाह

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भाषाई विविधता कमजोरी नहीं, देश की सबसे बड़ी ताकत और सांस्कृतिक पूंजी हैः अमित शाह


नई दिल्ली, 28 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि भारत की भाषाई विविधता कमजोरी नहीं, देश की सबसे बड़ी ताकत और सांस्कृतिक पूंजी है। योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रसार अपनी भाषाओं के माध्यम से ही संभव है।

केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने आज दिल्ली स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में आयोजित ‘हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह’ को वर्चुअली माध्यम से संदेश दिया। इस कार्यक्रम का विषय 'भारत मेरे दिल में बसता है' थी। इस अवसर पर वक्ताओं ने हिंदी के समृद्ध सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, मानवीय संवेदनाओं तथा वैश्विक प्रसार पर प्रेरणादायी व्याख्यान दिए।

मंत्री ने कहा, हिंदी किसी भी प्रांतीय भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं है, बल्कि यह सभी भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद, संपर्क और समन्वय की सबसे मजबूत कड़ी है। भाषा केवल बातचीत का जरिया नहीं बल्कि समाज की स्मृति और उसका आत्मबोध होती है। हिंदी का संपूर्ण विकास तभी संभव है जब वह देश की सभी भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के साथ आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से विशेष आग्रह किया कि वे दुनिया भर की भाषाएं जरूर सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें। भाषा बोलने में हीनभावना या लघुता-ग्रंथि महसूस करना सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि भाषा ही व्यक्ति को अपनी जड़ों, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है।

शाह ने रेखांकित किया कि इतिहास गवाह है कि हिंदी को जनसंवाद का माध्यम बनाने में उन विभूतियों की प्रमुख भूमिका रही जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने गुजराती भाषी होते हुए भी 'सत्यार्थ प्रकाश' की रचना हिंदी में की। महात्मा गांधी ने वर्ष 1918 में मद्रास में 'दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा' की नींव रखी। बांग्ला भाषी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 'आज़ाद हिंद फौज' की संपर्क भाषा हिंदी को बनाया और देश को 'जय हिंद' का अमर नारा दिया। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक स्वभाषा, स्वसंस्कृति और स्वाभिमान का विषय उपेक्षित रहा।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के दौर के पुराने कानूनों की जगह जन-केंद्रित तीन नए कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत मेडिकल और इंजीनियरिंग सहित उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं अब भारतीय भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं। 78वें स्वतंत्रता दिवस पर घोषित 'शक्ति की सप्तधारा' में भाषा भारत के 'सॉफ्ट पावर' का सबसे प्रमुख आधार है।

तकनीक के इस दौर में भारतीय भाषाओं के पिछड़ने की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने बताया कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सहयोग से भारतीय भाषाएं स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुकी हैं। राजभाषा विभाग की ओर से विकसित एआई-आधारित टूल विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद को सुगम बना रहे हैं। 8.27 लाख से अधिक प्रविष्टियों वाला डिजिटल शब्दकोश 'हिंदी शब्द सिंधु' ज्ञान साझा करने का प्रमुख माध्यम बन चुका है। वर्ष 2024 में स्थापित भारतीय भाषा अनुभाग प्रशासनिक कामकाज को क्षेत्रीय भाषाओं में सहज बना रहा है। संसदीय राजभाषा समिति ने अपने प्रतिवेदन के चार नए खंड राष्ट्रपति को सौंपे हैं।

राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150वें वर्ष का उल्लेख करते हुए मंत्री ने सभी नागरिकों से 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में हिंदी और सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त माध्यम बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

इस मौके पर सीएंडएसपी की ओर से साहित्य, कला और चिकित्सा जगत की पद्मश्री सहित 10 हस्तियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर, पद्मश्री डॉ. रंजना गौहर, पद्मश्री डॉ. जतिन दास, पद्मश्री डॉ. मोहसिन वली एवं पद्मश्री वी.एस. मेहता, पद्मश्री डॉ. दिनेश भार्गव, पद्मश्री डॉ. पुरूषोत्तम दधीच (पुरु), पद्मश्री भेरू सिंह चौहान, प्रो. विमलेश कांति वर्मा और अनिता वर्मा शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी