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चोरी कर बाहर ले जाई गईं 653 मूर्तियां व वस्तुएं प्रधानमंत्री मोदी के अभियान से वापस आईं : गजेन्द्र सिंह शेखावत

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चोरी कर बाहर ले जाई गईं 653 मूर्तियां व वस्तुएं प्रधानमंत्री मोदी के अभियान से वापस आईं : गजेन्द्र सिंह शेखावत


नई दिल्ली, 13 मई (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को कहा कि भारत की प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व की मूर्तियां केवल कला की वस्तुएं नहीं हैं बल्कि हमारी हजारों वर्षों की सभ्यता की निरंतरता का जीवंत प्रतीक हैं। गजेंद्र शेखावत ने संस्कृति मंत्रालय द्वारा देश की बहुमूल्य और खोई हुई सांस्कृतिक विरासत की सफल वापसी के उपलक्ष्य में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह बात कही।

गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा यह भारत की विरासत को पुनः प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत की वापसी को लेकर महत्वपूर्ण उपलब्धियां साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'विरासत संरक्षण' अभियान के तहत अब तक कुल 666 प्राचीन कलाकृतियाँ भारत वापस लाई जा चुकी हैं। विशेष बात यह है कि इनमें से 653 वस्तुएं अकेले वर्ष 2014 के बाद स्वदेश लौटी हैं। जबकि 1972 से 2014 के बीच केवल 13 पुरावस्तुएं भारत लाई जा सकी थीं।

मंत्री ने कहा, हम अपनी सभ्यता की निरंतरता के इन जीवित प्रतीकों को घर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत सरकार अपने कूटनीतिक प्रयासों से हर उस धरोहर को वापस लाएगी, जो गलत तरीके से देश से बाहर गई है। अमेरिकी एजेंसियों ने 657 अन्य कलाकृतियां भी जब्त की हैं, जिन्हें भारतीय दूतावास को सौंप दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जल्द ही इनका परीक्षण और मूल्यांकन कर इन्हें प्रदर्शित करेगा।

शेखावत ने बताया कि कल रात 11 बजे अमेरिका से दो महत्वपूर्ण मूर्तियां भारत पहुँचीं। इनमें चोल काल (12वीं सदी) की सोमस्कंद की मूर्ति और विजयनगर काल (16वीं सदी) की संत सुरिंदर और पारवई की कांस्य प्रतिमा शामिल है। कुल 11 मूर्तियां ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त हुई हैं, जिनमें नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया से 8 और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स से 3 मूर्तियां शामिल हैं। इनमें शुंग कालीन टेराकोटा, पाल राजवंश की वराह प्रतिमा और 11वीं सदी की बोधिसत्व प्रतिमा प्रमुख हैं। भारत और अमेरिका के बीच हुए 'सांस्कृतिक संपत्ति विनिमय समझौते' ने इस प्रक्रिया को और गति दी है।

मंत्री ने बताया कि अमेरिका के प्रसिद्ध 'स्मिथसोनियन संस्थान' ने तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी तीन अत्यंत महत्वपूर्ण कांस्य मूर्तियों को भारत को सौंप दिया है। तंजावुर के मंदिर की शिव नटराज की मूर्ति को स्मिथसोनियन संस्थान के अनुरोध पर 3 साल के 'शॉर्ट टर्म लोन' पर अमेरिका में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। इस मूर्ति को वर्तमान में दक्षिण एशिया और हिमालय में ज्ञान की कला प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने 127 साल बाद भारत लौटे भगवान बुद्ध के अवशेषों की वापसी को एक बड़ी उपलब्धि बताया।

एक सवाल के जबाव में मंत्री ने बताया कि बरामद किए गए पुरावशेषों के लिए लाल किले में एक समर्पित गैलरी बनाई गई है, जिसे और बेहतर बनाने का काम जारी है। टास्क फोर्स से अधिक सरकार के सभी स्टेकहोल्डर्स (प्रवर्तन एजेंसियां, दूतावास, और संस्कृति मंत्रालय) मिलकर इन वस्तुओं को वापस लाने के लिए काम कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी