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सीएसआईआर-सीआरआरआई ने की देश के 16 शहरों में स्वदेशी सड़क तकनीक के पहले चरण की शुरुआत

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सीएसआईआर-सीआरआरआई ने की देश के 16 शहरों में स्वदेशी सड़क तकनीक के पहले चरण की शुरुआत


नई दिल्ली, 16 जुलाई (हि.स.)। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने गुरुवार को देश के 16 शहरों-स्थानों में स्वदेशी सड़क निर्माण और रखरखाव तकनीकों के पहले चरण का शुभारंभ किया।

समारोह का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने किया। सीएसआईआर-सीआरआरआई की 75वीं वर्षगांठ (प्लैटिनम जुबली) समारोह की शुरुआत करते हुए डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सड़क तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर देशभर की सड़कों तक पहुंचाने के लिए उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2014 में लगभग 91,000 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क बढ़कर आज करीब 1.47 लाख किलोमीटर हो गया है। ऐसे में स्वदेशी, टिकाऊ और किफायती सड़क तकनीकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ एन. कलैसेल्वी ने बताया कि संस्थान की तकनीकों का उपयोग देश में 1,200 किलोमीटर से अधिक सड़कों पर किया जा चुका है, जिनमें लगभग 280 किलोमीटर स्टील स्लैग सड़कें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत के एक-तिहाई सड़क नेटवर्क पर सीएसआईआर - सीआरआरआई की तकनीकों को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर स्मार्ट मिक्सिंग प्लांट का शुभारंभ किया, जो सड़कों की सतह निर्माण की स्वदेशी तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने में मदद करेगा। साथ ही एआई-सक्षम नेटवर्क सर्वे वेहिकल और गड्ढा मरम्मत तकनीक का भी लोकार्पण किया गया।

मंत्री ने कहा कि स्टील स्लैग रोड, बायो-बाइंडर, जैसी स्वदेशी तकनीकें न केवल सड़कों को अधिक टिकाऊ बनाएंगी, बल्कि औद्योगिक कचरे के उपयोग से ‘वेस्ट टू वेल्थ’, सर्कुलर इकोनॉमी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करेंगी।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान ने कई तकनीकों का व्यावसायीकरण भी किया।

इसके अलावा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ कई समझौते और सहमति पर भी हस्ताक्षर किए गए ।

इस अवसर पर सीएसआईआर - सीआरआरआई का प्लैटिनम जुबली लोगो, 2026–27 का कार्यक्रम कैलेंडर तथा वार्षिक रिपोर्ट 2025–26 जारी की गई। संस्थान की उपलब्धियों के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी