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जल सुरक्षा और पुराने जल विवादों के समाधान में सी.आर. पाटिल की भूमिका की सोशल मीडिया पर चर्चा

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जल सुरक्षा और पुराने जल विवादों के समाधान में सी.आर. पाटिल की भूमिका की सोशल मीडिया पर चर्चा


सूरत/नई दिल्ली, 13 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की कार्यशैली और जल सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट चर्चा में है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भिकू म्हात्रे नामक अकाउंट से किए गए पोस्ट में पाटिल को कुशल राजनीतिज्ञ, रणनीतिकार और प्रशासक बताते हुए जल सुरक्षा, जल संरक्षण तथा वर्षों से लंबित अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान की दिशा में उनकी भूमिका की सराहना की गई है।

पोस्ट में कहा गया कि पाटिल अपने कार्यों का प्रचार करने के बजाय परिणामों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेखक ने लिखा कि उन्हें बार-बार यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उन्होंने क्या किया, क्योंकि उनका काम स्वयं उनकी कार्यशैली को दर्शाता है।

पोस्ट में जल जीवन मिशन, भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन, जल शक्ति अभियान और नमामि गंगे सहित विभिन्न पहलों का उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन को गति देने के साथ अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किया गया। वहीं, मनरेगा के माध्यम से भूजल पुनर्भरण के लिए 1.25 करोड़ से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण अथवा उपयोग का भी उल्लेख किया गया है।

‘कैच द रेन 2025’ अभियान का उल्लेख करते हुए पोस्ट में वर्षा जल संचयन और वाटरशेड प्रबंधन पर विशेष जोर दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ जल सुरक्षा से जुड़ी पहल के तहत जल संकट वाले क्षेत्रों में चेक डैम और खेत तालाब जैसी जल संरक्षण संरचनाओं को प्राथमिकता देने का उल्लेख किया गया है।

पोस्ट में उद्योगों के लिए रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल और रिचार्ज (4R) के सिद्धांत को बढ़ावा देने तथा जल के पुनः उपयोग और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की गई है।

नमामि गंगे कार्यक्रम को लेकर पोस्ट में 510 से अधिक परियोजनाओं की समीक्षा, लंबित मामलों के समाधान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और नदी पुनर्जीवन की दिशा में पहल का उल्लेख किया गया है।

दशकों पुराने जल विवादों के समाधान का भी उल्लेख

पोस्ट में अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों को भी प्रमुखता से रखा गया है। इसमें हरियाणा और राजस्थान से जुड़े वर्षों पुराने जल विवाद तथा नर्मदा से संबंधित गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबे समय से लंबित भुगतान और लागत साझेदारी से जुड़े मामलों के समाधान की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख किया गया है।

पोस्ट के लेखक ने इन प्रयासों को ‘सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण’ बताते हुए कहा कि संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से लंबे समय से लंबित जल संबंधी मुद्दों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम हुआ है।

पोस्ट के अंत में लेखक ने कहा कि सी.आर. पाटिल को अपने कार्यों का बार-बार श्रेय लेने की आवश्यकता नहीं है। जल सुरक्षा और वर्षों से लंबित जटिल विवादों के समाधान की दिशा में किए जा रहे कार्यों को इतिहास स्वयं दर्ज करेगा।

हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में उल्लिखित विभिन्न आंकड़े और दावे पोस्ट के लेखक द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे