कांग्रेस ने परिसीमन पर रिजिजू के जवाबी पत्र पर उठाए सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराई
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (हि.स.)। कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के परिसीमन के मुद्दे पर 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के पत्र पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि रिजिजू ने अपने जवाब में इसी साल मार्च में परिसीमन पर कुछ राजनीतिक दलों के साथ गृहमंत्री की हुई बातचीत का उल्लेख किया है, लेकिन उन चर्चाओं में किए गए आश्वासनों का जिक्र नहीं किया, जो 16 अप्रैल को पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं थे।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने मंगलवार को एक्स पोस्ट में सरकार से तीन सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के पास परिसीमन को लेकर कोई नया और ठोस प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी राजनीतिक दल से चर्चा की है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने, अपने नए प्रस्ताव को पारदर्शी तरीके से सभी दलों के सामने रखने और उनकी राय सुनने से क्यों बच रही है।
रमेश ने कहा कि यह विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पराजित हो गया था और रिजिजू ने अपने पत्र में जिन राजनीतिक दलों का संसद में चर्चा का जिक्र किया है उनमें से अधिकांश दलों ने भी विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। उन्होंने कहा कि खरगे ने सर्वदलीय बैठक की मांग छह बार लिखित रूप में उठाई है। इनमें चार पत्र प्रधानमंत्री मोदी और दो पत्र किरेन रिजिजू को लिखे गए थे। उन्होंने तीसरा सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार लोकसभा में पराजित विधेयक को फिर से लाने और उसे दोबारा पारित कराने की कोशिश करना चाहती है। ऐसा प्रयास भी सफल नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि खरगे ने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक पर विचार से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। इसके जवाब में रिजिजू ने 19 अक्टूबर को पत्र लिखकर कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद और सहयोग लेने के प्रयास किए थे। रिजिजू ने कांग्रेस से विधेयक पर रचनात्मक सहयोग करने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

