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प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने रील को बताया 21वीं सदी का नशा, बोले- 1,000 युवाओं में सिर्फ 12 को पक्की नौकरी

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प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने रील को बताया 21वीं सदी का नशा, बोले- 1,000 युवाओं में सिर्फ 12 को पक्की नौकरी


प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने रील को बताया 21वीं सदी का नशा, बोले- 1,000 युवाओं में सिर्फ 12 को पक्की नौकरी


प्रयागराज, 08 अगस्त (हि.स.)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं के रोजगार, शिक्षा, पेपर लीक, डेटा और आर्थिक अवसरों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया गया है, जहां परिवार पढ़ाई पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन डिग्री हासिल करने के बाद भी स्थायी रोजगार की गारंटी नहीं मिलती। राहुल गांधी ने दावा किया कि एक हजार युवाओं में सिर्फ 12 युवाओं को ही पक्की नौकरी मिलती है।

राहुल गांधी ने यहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में करीब 48 मिनट के संबोधन में कहा कि वह युवाओं से दर्द, डेटा और दौलत की बात करने आए हैं। भारत में करीब 40 करोड़ युवा हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके मुताबिक 21वीं सदी में भारत की अर्थव्यवस्था युवाओं की शक्ति और उनके डेटा के आधार पर आगे बढ़ सकती है। साथ ही कहा कि चीन की चर्चा होती है, लेकिन भारत के युवाओं के सामने उसकी ताकत कुछ भी नहीं है। युवाओं की क्षमता का सही इस्तेमाल करके भारत को दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत बनाया जा सकता है।

राहुल गांधी ने कहा कि युवा और डेटा 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत हैं। युवाओं के डेटा के बिना एआई का कोई मतलब नहीं है। डेटा से एआई बनाया जा सकता है, लेकिन एआई से डेटा नहीं बनाया जा सकता। डेटा युवाओं का है और क्षमता भी युवाओं की है, लेकिन व्यवस्था ने युवाओं को ही चक्रव्यूह में फंसा दिया है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को पढ़ाई के लिए परिवारों से लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करवाए जाते हैं। बीए, एमए और दूसरी डिग्रियां हासिल करने के बाद उन्हें एक सर्टिफिकेट मिलता है, लेकिन यह सर्टिफिकेट रोजगार की गारंटी नहीं देता। राहुल गांधी ने कहा कि आज एक हजार युवाओं में सिर्फ 12 को ही स्थायी नौकरी मिलती है।

राहुल गांधी ने युवाओं के लिए रोजगार के पांच रास्ते बंद होने का दावा किया। उन्होंने सबसे पहले विनिर्माण का मुद्दा उठाया और कहा कि दुनिया में मेड इन चाइना, मेड इन वियतनाम और मेड इन बांग्लादेश के उत्पाद दिखाई देते हैं, लेकिन मेड इन इंडिया पर्याप्त मात्रा में नहीं दिखाई देता।

उन्होंने दूसरे रास्ते के रूप में स्टार्टअप और उद्यमिता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों और युवाओं को बैंकों से आसानी से कर्ज नहीं मिलता, जबकि बड़े उद्योगपतियों को बड़ी रकम उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्टार्टअप इंडिया का क्या हुआ और युवाओं तथा छोटे कारोबारियों के लिए बैंकिंग व्यवस्था इतनी कठिन क्यों है।

सरकारी नौकरियों को तीसरा रास्ता बताते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले करीब 150 उम्मीदवारों में से सिर्फ एक युवा को नौकरी मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवाओं के कई वर्ष लग जाते हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में देरी, पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है।

उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र को रोजगार का चौथा रास्ता बताते हुए दावा किया कि 2014 से पहले सार्वजनिक क्षेत्र में करीब 14 लाख नौकरियां थीं, जबकि अब यह संख्या करीब सात लाख रह गई है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण की नीति पर सवाल उठाया और कहा कि इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

कॉरपोरेट क्षेत्र को पांचवां रास्ता बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से कॉरपोरेट नौकरियों पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक के कारण रोजगार की चुनौती और गंभीर हो सकती है।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं की स्थिति को लेकर अपनी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं। एक छात्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उसने 2017 की दरोगा भर्ती परीक्षा, 2018 की यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, 2020-21 की यूपी एसआई भर्ती परीक्षा, 2022 की लेखपाल भर्ती परीक्षा, 2023 की आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा और 2023 की यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का उल्लेख किया।

छात्र ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण युवाओं का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने या पेपर लीक होने के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है।

राहुल गांधी ने कार्यक्रम में सात से अधिक छात्र-छात्राओं से बातचीत की। उन्होंने उनसे शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े सवाल किए। छात्रों ने भी अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 23 जिलों से छात्रों को बुलाया गया था। कांग्रेस ने दावा किया था कि कार्यक्रम के लिए दो लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया है।

उल्लेखनीय है कि प्रयागराज में कार्यक्रम का समय पहले शाम छह बजे निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में शाम सात बजे कर दिया गया। कार्यक्रम को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक विवाद भी चल रहा था। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन कार्यक्रम को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। कार्यक्रम के लिए पहले तय स्थल की अनुमति वापस लिए जाने के बाद आयोजन को लेकर अनिश्चितता भी बनी थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर