कोटा में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की शुरुआत कर बोले राहुल गांधी- मौजूदा शिक्षा प्रणाली रोजगार की गारंटी नहीं देती, पूरा तंत्र बदलना जरूरी
कोटा, 17 जून (हि.स)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कोटा में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में कहा कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली रोजगार की गारंटी नहीं देती, इसलिए पूरे तंत्र को बदलना जरूरी है। भारत का शिक्षा तंत्र अब 'चयन' नहीं बल्कि 'अस्वीकृति प्रणाली' बन गया है, जहां परीक्षाओं के नाम पर सरकार पांच मंत्रालयों के बजट जितना पैसा अभिभावकों से वसूल लेती है। उन्होंने 3,000 छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनमें से सिर्फ एक प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाएगा, 30 आईआईटी पहुंचेंगे और केवल 180 ही डॉक्टर बन पाएंगे।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कोटा से राष्ट्रव्यापी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की शुरुआत की। यह कार्यक्रम देश भर में हाल ही में हुए नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले और परीक्षाओं में हुई धांधली के बाद प्रभावित छात्रों की आवाज उठाने के लिए आयोजित किया गया। कोटा के दशहरा मैदान स्थित श्री राम रंगमंच पर आयोजित इस विशेष संवाद में राहुल गांधी ने नीट और जेईई के अभ्यर्थियों तथा उनके अभिभावकों को भी सुना। उन्होंने मंच पर सामिया मीणा, सानिया गुप्ता और हिमांशु डांगी नामक तीन विद्यार्थियों को अपने पास बुलाकर उनसे संवाद किया।
राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच या भाषणबाजी का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के युवाओं की आवाज का मंच है। आज का यह कार्यक्रम छात्रों के दर्द, उनकी समस्याओं, शिक्षा और रोजगार के असल मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने के लिए है।
उन्होंने कहा कि लाखों छात्र सालों तक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन चयन महज कुछ लोगों का ही होता है। वर्तमान तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि देश के 80 प्रतिशत अभियंता (इंजीनियर) बेरोजगार घूम रहे हैं। यह शिक्षा तंत्र नहीं, बल्कि सिर्फ पैसे वसूलने और लूट का माध्यम बनकर रह गया है।
राहुल गांधी ने अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' का जिक्र करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें लाखों ऐसे युवा मिले जो डॉक्टर, अभियंता, वकील, प्रशासनिक सेवा और सेना में जाना चाहते थे। तब उनके मन में यह सवाल आया कि देश की शिक्षा प्रणाली युवाओं को सिर्फ यही पांच विकल्प क्यों दे रही है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कुछ लड़कियों से उनके दिल की बात पूछी, तो उन्होंने इन पांच पेशों से हटकर अलग-अलग सपने बताए। इससे साफ है कि देश का शिक्षा तंत्र बच्चों के सपने पूरे नहीं कर रहा, बल्कि उन पर अपनी पसंद थोप रहा है। देश का युवा असीमित संभावनाओं से भरा है, लेकिन नीतियां उन्हें एक संकुचित दायरे में बांधने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने हाल ही में खुदकुशी करने वाली छात्रा आकांक्षा का सुसाइड नोट दिखाते हुए कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती थी। उसके पिता पक्षाघात (पैरालिसिस) से पीड़ित हैं, जिन्होंने भारी कर्ज लेकर उसे कोटा में पढ़ाया था, लेकिन नीट का प्रश्नपत्र लीक हो गया। आकांक्षा ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि 'सॉरी मम्मी-पापा, मैंने आप लोगों का सब बर्बाद कर दिया'।
राहुल गांधी ने कहा कि सच्चाई यह है कि इसमें आकांक्षा की कोई गलती नहीं थी, यह आकांक्षा की नहीं बल्कि हमारे देश के तंत्र की नाकामी है। हमें मिलकर यह तय करना होगा कि देश का कोई भी छात्र कभी ऐसी स्थिति में न आए कि उसे अपनी जान देने के बारे में सोचना पड़े। शिक्षा के नाम पर होने वाली यह मानसिक प्रताड़ना बंद होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाना पड़े, यह व्यवस्था पूरी तरह गलत है। यह काम देश का है कि वह अपने हर बच्चे को मुफ्त, सुलभ और बेहतर शिक्षा दे ताकि उनके सपने पूरे हो सकें।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सीमित संसाधनों की वजह से आज 22 लाख नीट देने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से भारी वसूली की जा रही है।
शिक्षा का यह बेलगाम व्यापार एक सामाजिक अपराध है। हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की जरूरत है, जहां देश के युवा कम खर्च में बेहतर शिक्षा पा सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

