सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर होती हैं: सीजेआई सूर्यकांत
नई दिल्ली, 13 जुलाई (हि.स.)। भारत के
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की मजबूती के लिए बेंच और बार के बीच सहयोग बेहद आवश्यक है। सोमवार को कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम द्वारा विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसमें न्यायिक योग्यता, ईमानदारी, अनुभव और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। साथ ही, देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और क्षेत्रों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का भी ध्यान रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाले प्रत्येक न्यायाधीश का चयन कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद ही होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नव नियुक्त न्यायाधीश अपनी योग्यता, अनुभव और निष्पक्षता से सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को और बढ़ाएंगे तथा न्यायपालिका को नई मजबूती प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के नव नियुक्त न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस वी. मोहना का सम्मान किया गया। हाल ही में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस पंकज मित्तल को भी सम्मानित किया गया।
ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आदिश सी. अग्रवाला ने कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिसार की जिला न्यायपालिका से देश के मुख्य न्यायाधीश बनने तक न्यायमूर्ति सूर्यकांत का सफर योग्यता, अनुशासन और कड़ी मेहनत का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि युवा वकीलों को प्रोत्साहन देने और सभी के लिए सहज उपलब्ध रहने की उनकी कार्यशैली ने बेंच और बार के संबंधों को और मजबूत किया है।
डॉ. अग्रवाला ने कहा कि यह समारोह दो महत्वपूर्ण अवसरों के लिए आयोजित किया गया था—जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस पंकज मित्तल की उत्कृष्ट न्यायिक सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त करना तथा सुप्रीम कोर्ट के पांच नए न्यायाधीशों के पदोन्नयन का स्वागत करना। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने संवैधानिक मूल्यों, स्वतंत्र सोच और निष्पक्षता की समृद्ध विरासत छोड़ी है, जबकि नए न्यायाधीशों की नियुक्ति उनकी ईमानदारी, कानूनी दक्षता और न्याय के प्रति समर्पण की पहचान है।
उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भी सराहना की। कॉलेजियम में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशें योग्यता, ईमानदारी और न्यायिक उत्कृष्टता पर आधारित हैं, जिससे न्यायपालिका में जनता का विश्वास और मजबूत होता है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने न्यायपालिका में संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की मांग की। साथ ही, न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने की भी वकालत की।
पी. विल्सन ने सुप्रीम कोर्ट से कोर्टरूम में अनुचित व्यवहार के खिलाफ संस्थागत सुरक्षा उपायों पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा, स्वतंत्रता और पवित्रता बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बच्चे कभी-कभी अप्रत्याशित व्यवहार कर बैठते हैं: सीजेआई
हाल ही में अदालत कक्ष में हुई कथित अनुचित घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि बच्चे कभी-कभी अप्रत्याशित व्यवहार कर बैठते हैं, लेकिन संस्थाएं हमेशा व्यक्तियों से बड़ी होती हैं। उन्होंने सभी से न्यायिक संस्थाओं की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह संस्थानों के सम्मान और प्रतिष्ठा को सर्वोपरि रखे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

