बाल विवाह मुक्ति रथ ने की 66,344 गांवों की यात्रा, देश को किया जागरूक
नई दिल्ली, 08 मार्च (हि.स.)। देशभर में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकले ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की 28 राज्यों में यात्रा का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समापन हुआ। पिछले एक महीने में इस रथ ने 6,79,077 किलोमीटर की यात्रा कर 28 राज्यों, 439 जिलों और 66,344 गांवों से होते हुए कुल 5,22,68,033 लोगों तक बाल विवाह मुक्त भारत का संदेश पहुंचाया। बाल विवाह के खिलाफ केंद्र सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत नागरिक समाज संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने देशभर में 500 से अधिक बाल विवाह मुक्ति रथ सड़कों पर उतारे। इन रथों ने देश के कोने-कोने में जाकर बाल विवाह से जुड़े कानूनों और खास तौर से लड़कियों पर इसके दुष्प्रभावों के बारे में जनसमुदाय को जागरूक किया।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सीनियर एडवाइजर (पॉलिसी) ज्योति माथुर ने पत्रकारों को बताया, “यह रथ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय का वाहक है। यह जनसमुदाय तक कानून, संरक्षण और जवाबदेही का संदेश लेकर जाता है, ताकि सरकार की मंशा जमीन पर वास्तविक सुरक्षा में तब्दील हो सके। इस अभियान में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर शिक्षाविदों और महिला भुक्तभोगियों तक सभी ने उत्साह से भागीदारी की। खास तौर पर जमीनी स्तर के महिला नेतृत्व का अग्रिम मोर्चे से इस संदेश को आगे ले जाते देखना बेहद प्रेरक रहा। ऐसी व्यापक भागीदारी और तात्कालिकता के साथ हमें विश्वास है कि भारत 2030 की वैश्विक समयसीमा से पहले ही बाल विवाह जैसे अपराध से मुक्त हो जाएगा।”
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, “हमारा हौसला बढ़ाने वाली बात यह है कि दुनिया अब उसे स्वीकार कर रही है जो हम एक दशक से कह रहे हैं कि बाल विवाह दरअसल हमारे बच्चों से बलात्कार है और इसे उसी रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।”
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अपने सहयोगी संगठनों, स्थानीय प्रशासन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं व बाल विवाह में सेवाएं प्रदान करने वाले बैंड बाजा, घोड़ी, सजावट, डीजे व व खाना बनाने वाले कैटर्रस के समन्वित प्रयासों से पिछले एक वर्ष में ही देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रुकवाए हैं।
उल्लेखनीय है कि ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर केंद्र सरकार के 100 दिवसीय गहन अभियान को सफल बनाने के लिए जेआरसी ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ यात्रा की शुरुआत की थी।
पोस्टरों, प्रभावशाली नारों, लाउडस्पीकर और बाल विवाह के खिलाफ शपथ के लिए बोर्ड से सुसज्जित यह रथ उन दूरदराज और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक पहुंचने के लिए तैयार किया गया था। जहां बेहतर सड़कों वाले इलाकों में चार पहिया वाहनों के माध्यम से यह अभियान पहुंचा, वहीं दूरदराज के गांवों तक मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया गया। इस यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ ने पंचायतों, जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों और प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर जनता को जागरूक किया और बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

