छत्तीसगढ़ में 2030 तक 15 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी बनाने का लक्ष्यः विष्णु देव साय
नई दिल्ली, 02 नवंबर (हि.स.)। वैश्विक मंच भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो-2026 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य का लक्ष्य वर्ष 2030 तक हरित ऊर्जा क्षमता को वर्तमान लगभग 3,000 मेगावाट से बढ़ाकर 15,000 मेगावाट करना है। इसके साथ बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी मौजूदा लगभग 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन के राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण योगदान देगा। राज्य में 28 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र पहले से स्थापित हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत मंडपम में चार दिवसीय समिट का उद्घाटन किया। इसके बाद मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की उच्चस्तरीय राउंड टेबल बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ का ऊर्जा विजन प्रस्तुत करते हुए अगले पांच वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की रूपरेखा साझा की। उन्होंने निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को राज्य में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी तथा केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनांदगांव जिले का खेरा गांव छत्तीसगढ़ का पहला पूर्ण सोलर गांव बन गया है। गांव के सभी 141 घरों की छतों पर 2 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं। इससे गांव में 282 किलोवाट बिजली बनेगी। खास बात यह है कि 93 प्रधानमंत्री आवास भी सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और ग्रामीणों को कोई खर्च नहीं करना पड़ा।
सौर ऊर्जा को घरों और खेतों तक पहुंचाने की दिशा में भी राज्य ने प्रगति की है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत लगभग 1.26 लाख सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। राज्य में 1.66 लाख सोलर सिंचाई पंपों से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है।
वहीं, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 395 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कृषि अपशिष्ट, गोबर और अन्य जैव संसाधनों के उपयोग से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। राज्य में 80 मीट्रिक टन क्षमता के आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर काम चल रहा है, जिनमें लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। निजी निवेशकों के करीब 6,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर भी काम किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लगभग 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित अन्य ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
ऊर्जा क्षमता
समिट के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। यहां राज्य की ऊर्जा परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, तकनीकी पहलों और निवेश संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। उन्होंने निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद कर राज्य की नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और परियोजनाओं में भागीदारी के अवसरों की जानकारी दी।
02 से 05 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक समिट में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि तथा 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और उद्योग जगत के प्रमुख शामिल हो रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ कंट्री पार्टनर के रूप में सहभागी बनेंगे।
‘निवेश, नवाचार और प्रेरणा’ थीम पर आयोजित इस आयोजन में छत्तीसगढ़ ने अपनी पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ हरित ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भावी निवेश की संभावनाओं को वैश्विक निवेश समुदाय के सामने रखा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

