सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में ईडी ने 30 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया
रायपुर, 05 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) ने 30 लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग और 'कैश सिंडिकेट' की जांच के सिलसिले में बीती देर रात नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है।
मुख्य आरोपित उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने कथित कैश सिंडिकेट का पता लगाने के लिए विवादित अभ्यर्थियों, एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों को पूछताछ के लिए बुलाया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ईडी ने इस नेटवर्क के 'तार जोड़ने' के लिए मुख्य रूप से 16 से अधिक ऐसे लोगों को बुलाया था जो सीधे तौर पर अभ्यर्थी, कुछ स्थानीय कारोबारी या प्रॉपर्टी डीलर थे। इसके तुरंत बाद, जब ईडी ने 'कैश सिंडिकेट' और मनी लॉन्ड्रिंग की विस्तृत जांच शुरू की, तो इस दायरे को बढ़ा दिया गया। अब इसमें करीब 30 लोग शामिल हैं।
ज्ञात हो कि, मामले के एक प्रमुख बिचौलिए कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को एक सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उस पर नौकरी दिलाने के नाम पर ₹3 करोड़ से अधिक जुटाने और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करने का आरोप है। 5 सितंबर तक वह ईडी की कस्टोडियल रिमांड पर है, जिससे हुई पूछताछ के आधार पर यह नए नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि परीक्षा के लीक प्रश्न पत्र बांटने के बदले जो करोड़ों रुपये नकद वसूले गए थे, उन्हें किन-किन बैंकिंग चैनल्स, सीएसआर फंड या फर्जी कंपनियों से सफेद या ट्रांसफर किया गया।यह भी बताया गया है कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉक्टर विकास चंद्राकर ने परीक्षा पास कराने का दावा करके अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले थे। इसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये महासमुंद के डॉ अनिल चंद्राकर नाम के व्यक्ति तक पहुंचाए गए।
ज्ञात हो कि एक सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में पांच ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड और बेनामी संपत्ति से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
ईडी को आशंका है कि बड़ी कंपनी के सीएसआर फंड का इस्तेमाल रिश्वत की रकम देने के लिए किया गया। एजेंसी एनजीओ और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लेनदेन की भी जांच कर रही है।इस घोटाले में अनिल चंद्राकर नामक व्यक्ति का नाम प्रमुखता से शामिल है और वह ईडी की जांच के दायरे में है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अनिल चंद्राकर इस पूरे मामले में पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) की एक मुख्य कड़ी है।
एजेंसी के अनुसार मुख्य आरोपित उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने सीजीपीएससी-2021 परीक्षा का पेपर लीक कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से ₹3 करोड़ से अधिक की नकदी (कैश) वसूली थी। जांच में पाया गया कि इस वसूली गई रकम में से करीब ₹2.80 करोड़ अनिल चंद्राकर को सौंपे गए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अनिल चंद्राकर छत्तीसगढ़ का एक कारोबारी है और मुख्य आरोपित उत्कर्ष चंद्राकर का करीबी सहयोगी है। अभ्यर्थियों से पैसे जुटाने और कैश सिंडिकेट के इस नेटवर्क को संचालित करने में उसकी बड़ी भूमिका रही है।
फिलहाल, डॉ. विकास चंद्राकर और अनिल चंद्राकर से पूछताछ जारी है। ईडी अब कथित कैश सिंडिकेट में रकम के स्रोत, उसके वितरण और लाभार्थियों के बीच संबंधों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

