(लीड) बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होकर प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा: राष्ट्रपति
जगदलपुर/रायपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में आमसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होकर प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।राष्ट्रपति द्रौपदी ने बस्तर दशहरा के अवसर पर जगदलपुर के लालबाग मैदान में आमसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आस्था का एक जीवंत प्रतीक है। बस्तर दशहरा उत्सव में समूचे समाज की जिस तरह से सहभागिता होती है, वह असाधारण है। समाज के विभिन्न वर्गों को आत्मीयता से जोड़ने वाले अनेक अनुष्ठान इस उत्सव को विशेष रूप से आकर्षक बनाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ने लंबे समय तक नक्सलवाद का दंश सहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह क्षेत्र नक्सली आतंक से मुक्त हो चुका है और अब प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि हाल के दिनों में जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सहायता देकर उन्हें बाजार से जोड़ने की पहल और तेज की गई हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये प्रयास समतापरक और समावेशी विकास के माध्यम से वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि जनजातीय समुदाय जीवनदायिनी प्रकृति की पूजा करते हैं और विकास की यात्रा में, हमें उनकी प्रकृति-पोषक जीवन पद्धति से उपयोगी शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर भी बल दिया।राष्ट्रपति ने लोगों से पेड़-पौधों और जंगलों को बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मेडल जीत सकते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय बस्तर दौरे पर आई थीं। इस दौरान उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन किए और सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में मांझी-चालकियों व जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की।उन्होंने मुरिया दरबार की परंपरा को लोकतंत्र का गौरव बढ़ाने वाली व्यवस्था बताया। इसके बाद राष्ट्रपति ने लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा और जनजातीय संस्कृति पर आधारित स्टॉल देखे।
प्रदर्शनी के दौरान वे एक बच्ची से मिलीं और पूछा कि बड़ी होकर क्या बनोगी? बच्ची ने जवाब दिया- कलेक्टर बनूंगी। बस्तर दशहरे के मुरिया दरबार में शामिल होने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति हैं।जगदलपुर में, उन्होंने रंगोली तथा दशहरा प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
इससे पूर्व, राष्ट्रपति ने जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की।
ज्ञात हो की राज्य सरकार ने बस्तर संभाग के पारंपरिक सामाजिक प्रमुखों के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की है। मांझी का मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

