ग्रंथालय भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच महत्वपूर्ण सेतुः श्रीनिवास वरखेड़ी
नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने सोमवार को कहा कि ग्रंथालय भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच महत्वपूर्ण सेतु है। पुस्तकालयों को संग्रहालय नहीं यह ‘नॉलेज रिसोर्स सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
प्रो वरखेड़ी यहां भारतीय पुस्तकालय वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. एस आर रंगनाथन की 134वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस समारोह एवं विशेष व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश के पुस्तकालयों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने तथा दुर्लभ ग्रंथों, पांडुलिपियों को शोधार्थियों और आमजन तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा, ऐसी परंपरा विद्यार्थियों के ज्ञान को निरंतर आगे बढ़ाती हैं। हमें इस अमूल्य ज्ञान-धरोहर की रक्षा करते हुए उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का दायित्व निभाना होगा। उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण, विद्यार्थियों को शोध से जोड़ने तथा बी लिब और एम लिब पाठ्यक्रमों को पांडुलिपि अध्ययन से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ पीएम गुप्ता ने कहा कि संस्कृत पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं यह भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत केंद्र हैं। ज्ञान को अलमारियों तक सीमित रखने के बजाय डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ज्ञान-साझाकरण नेटवर्क के माध्यम से विश्व तक पहुंचाना होगा।
दिल्ली के आईआईटी स्थित केंद्रीय पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नबी हसन ने कहा कि भाषा लोगों को जोड़ती है और उनमें अपनत्व की भावना पैदा करती है। संस्कृत की ज्ञान-संपदा का विस्तार भारत से बाहर भी है। नेपाल, जर्मनी, ब्रिटेन सहित अनेक देशों के संस्थानों में संस्कृत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियां संरक्षित हैं।
शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कहा कि दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण के साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
डॉ. हसन ने देश-विदेश के संस्कृत पुस्तकालयों एवं संसाधनों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और डिजिटल नेटवर्क विकसित करने, पुस्तकालय कैटलॉग को आपस में जोड़ने तथा उपलब्ध संसाधनों को शोध से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो आरजी मुरलीकृष्ण, प्रो काशीनाथ न्योपाने, प्रो मधुकेश्वर भट्ट, प्रो रत्नमोहन झा, प्रो कुलदीप शर्मा, प्रो लीना सक्करवाल, प्रो नारायण आरएल सिंहा, प्रो अजय मिश्रा, डॉ देवानंद शुक्ल एवं ड. योगेन्द्र दीक्षित सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी तथा अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

