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अगले दो दशकों में असामान्य गर्म दिनों में प्रतिवर्ष 40 दिनों की हो सकती है बढ़ोतरी: सीईईडब्ल्यू

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अगले दो दशकों में असामान्य गर्म दिनों में प्रतिवर्ष 40 दिनों की हो सकती है बढ़ोतरी: सीईईडब्ल्यू


नई दिल्ली, 29 अप्रैल (हि.स.)। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने बुधवार को आर्टिफिशियसल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित 'क्लाइमेट रेजिलिएंस एनालिटिक्स एंड विजुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम' (क्रेविस) को जारी किया। इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

इस अवसर पर पीयूष गोयल ने कहा कि सीईईडब्ल्यू का बनाया क्रेविस प्लेटफॉर्म इस बात में व्यापक बदलाव ला सकता है कि लगातार गर्म होती दुनिया में भारत अपनी योजनाएं कैसे बनाए। पीयूष गोयल ने कहा कि बढ़ता तापमान, गर्म दिनों की बढ़ती संख्या और भारी बारिश की लगातार होती घटनाएं, इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन भारत के लिए मौजूदा समय की वास्तविकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है। पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत ने जलवायु कार्रवाई (क्लाइमेट एक्शन) को केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि एक आर्थिक रूप से व्यहार्य योजना बनाने की दिशा में काम किया है। आगे बढ़ते हुए, कॉरपोरेट बोर्डरूम को जलवायु जोखिमों को अपने मुख्य निर्णयों में शामिल करना होगा। उन्होंने कहा कि यह एप भारत के बढ़ते 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (डीपीआई) में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसने पहले ही यूपीआई, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) और वैक्सीन मैत्री जैसी सफलताओं को देखा है।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर के सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म जलवायु लचीलेपन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) के लिए हमारे 12 वर्षों के कार्यों पर आधारित है: 2014-15 में शुरुआती वैश्विक प्रयासों से लेकर बहुत ही बारीक शहर-स्तरीय विश्लेषणों तक, जैसे कि अमरावती में हमारा काम हो या सभी जिलों के जोखिम की मैपिंग करना, या अब लचीलेपन को सशक्त बनाने के लिए तैयार की गई केविस जैसी एक गतिशील, एआई-सक्षम प्रणाली। जलवायु विज्ञान और एआई में प्रगति के बावजूद, निर्णयकर्ताओं को अभी भी ऐसी व्यावहारिक जानकारियों (ऐक्शनेबल इनसाइट्स) की जरूरत होती है जो उन्हें समय पर कदम उठाने में सक्षम बनाए। क्रेविस को क्लाइमेट इंटेलिजेंस को एक मॉडल से निकालकर शासन के सभी स्तरों पर निर्णय-कर्ताओं के हाथों तक पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है, ताकि इसे भारत के सभी जिलों से लेकर बाजारों तक, और अंत में संपूर्ण 'ग्लोबल साउथ' में विभिन्न क्षेत्रों और स्तरों पर दैनिक योजनाओं और प्रतिक्रिया प्रणालियों के लिए उपयोगी, विश्वसनीय और उसमें शामिल करने योग्य बनाया जा सके।”

उल्लेखनीय है कि 'क्रेविस' प्लेटफॉर्म 40 से अधिक वर्षों के ऐतिहासिक जलवायु आंकड़ों को 2030-2050 और 2051-2070 तक का अनुमान देता है। यह विभिन्न उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े परिदृश्यों के तहत 279 संकेतकों के आधार पर जिला-स्तरीय विश्लेषण करने में सक्षम है। यह उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) को एकीकृत जोखिम विश्लेषण करने के लिए जलवायु के आंकड़ों को विभिन्न क्षेत्रीय आंकड़ों के साथ , जैसे बिजली का बुनियादी ढांचा, कृषि, भूमि उपयोग और जनस्वास्थ्य, जोड़कर देखने और समझने की सुविधा भी देता है।

'क्रेविस' के निष्कर्षों के अनुसार, भारत के 281 डेटा सेंटर्स में से आधे से अधिक पहले से ही प्रति वर्ष 90 से अधिक दिनों तक 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान का सामना कर रहे हैं। 2040 तक, यह स्थिति लगभग 90 प्रतिशत डेटा सेंटर्स के सामने आ सकती है। इससे इनकी कूलिंग (शीतलन) की ज़रूरतें और परिचालन लागत में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। दिल्ली में वर्तमान में लगभग 180 दिनों की तुलना में अगले 25 वर्षों में गर्म रातों (20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर न्यूनतम तापमान) की संख्या 210 दिनों से अधिक होने का अनुमान है, जो कूलिंग की मांग में एक अतिरिक्त महीने की वृद्धि के बराबर है। इसका असर बिजली की अधिकतम मांग (पीक लोड) और वार्षिक खपत, दोनों पर पड़ेगा। तापमान वृद्धि के साथ-साथ, अगले दो दशकों में भारी बारिश की घटनाएं भी लगातार बढ़ने का अनुमान है। 'क्रेविस' के अनुसार, कई जिलों में प्रतिवर्ष भारी बारिश वाले 10 से 30 दिनों की वृद्धि देखी जा सकती है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे मध्य और दक्षिणी राज्यों में बारिश और गर्म दिनों, दोनों में ही अधिक वृद्धि होने की संभावना है। सीईईडब्ल्यू के ये निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं, जब भारत शुरुआती लू (हीटवेव) से लेकर संभावित 'सुपर अल नीनो' जैसी जलवायु की चरम स्थितियों का सामना कर रहा है। भारत पहले से ही गर्मी के बढ़ते जोखिम को देख रहा है, जहां 57 प्रतिशत से अधिक जिले और लगभग 75 प्रतिशत आबादी के सामने अधिक से बहुत अधिक गर्मी का जोखिम मौजूद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी