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सीबीडी कोप-17 में भारत ने जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई

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सीबीडी कोप-17 में भारत ने जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई


-विकसित देशों से वित्त और तकनीक देने की मांग

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को जैव विविधता संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को लागू करने में देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, परिस्थितियों और कानूनों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने विकसित देशों से विकासशील देशों को पर्याप्त और नियमित वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और तकनीक हस्तांतरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

भूपेंद्र यादव ने आर्मेनिया की राजधानी येरेवान में जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (सीबीडी) के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन (कोप-17) के उच्चस्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। उन्होंने सम्मेलन की मेजबानी के लिए आर्मेनिया सरकार की सराहना की और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहने के लिए सामूहिक प्रयास मजबूत करने का आह्वान किया।

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा को लागू करते समय प्रत्येक देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। इसके लिए वित्तीय संसाधनों के साथ तकनीकी सहयोग और संस्थागत क्षमता बढ़ाने की भी जरूरत है। उन्होंने बताया कि भारत ने वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के अनुरूप अपनी अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य और उनकी प्रगति मापने के लिए 142 संकेतक निर्धारित किए गए हैं।

उन्होंने आनुवंशिक संसाधनों से जुड़ी डिजिटल अनुक्रम सूचना (डीएसआई) से मिलने वाले लाभों को साझा करने के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था का समर्थन किया। इसमें कैली फंड भी शामिल है। सिंथेटिक बायोलॉजी और जैव सुरक्षा के विषय पर उन्होंने विज्ञान आधारित, जोखिम के अनुपात के अनुरूप और एहतियाती दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।

देश में 1,134 संरक्षित क्षेत्र और 103 रामसर स्थल

भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि देश में 1,134 संरक्षित क्षेत्र, 103 रामसर स्थल, 57 जैव विविधता विरासत स्थल और 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं। इनमें से 13 बायोस्फीयर रिजर्व यूनेस्को के मानव एवं जैवमंडल नेटवर्क में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस दुनिया की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। इसके अलावा, मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

मैंग्रोव और आर्द्रभूमि संरक्षण पर भी जोर

केन्द्रीय

मंत्री ने बताया कि भारत मैंग्रोव वनों की बहाली के लिए ‘मिष्टी’ पहल, आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए ‘अमृत धरोहर’ और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के माध्यम से भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत ने जैव विविधता अभिसमय के अनुरूप अपने कानूनों को तैयार किया है और जैविक संसाधनों तक विकेंद्रीकृत पहुंच तथा उनसे मिलने वाले लाभों के बंटवारे के लिए गांव स्तर पर समितियां गठित की हैं। इससे स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने और जैविक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग से उन्हें लाभ पहुंचाने में मदद मिलती है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा को आगे बढ़ाने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। उन्होंने ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी