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कैच द रेन अभियान के तहत 900 से अधिक शहरी निकायों में जल संरक्षण कार्य तेज

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कैच द रेन अभियान के तहत 900 से अधिक शहरी निकायों में जल संरक्षण कार्य तेज


नई दिल्ली, 13 जुलाई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के पुनर्जीवन को बढ़ावा देने के लिए ‘कैच द रेन अभियान : जहां बारिश की बूंद गिरे, वहीं उसका संचयन करें’ अभियान के तहत देशभर में व्यापक स्तर पर काम तेज कर दिया है। अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 900 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि अमृत 2.0 के तहत जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूल शहरी विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। जल शक्ति अभियान-जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 के साथ समन्वय में 79 नगर निगमों में एक लाख 99 हजार 278 भूजल पुनर्भरण सुविधाएं विकसित की गई हैं, जबकि 738 शहरी स्थानीय निकायों में 73 हजार 36 पुनर्भरण ढांचों पर कार्य चल रहा है।

मंत्रालय के अनुसार अमृत 2.0 के अंतर्गत शैलो एक्वीफर मैनेजमेंट (एसएएम) कार्यक्रम भी लागू किया जा रहा है, जिसके तहत वैज्ञानिक एक्वीफर मैपिंग और लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण क्षमता बढ़ाई जा रही है। पश्चिम बंगाल के बर्दवान और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में इंजेक्शन बोरवेल युक्त रिचार्ज पिट बनाए गए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में भंडारण सुविधा वाले रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा और तेलंगाना के वारंगल में मानसून से पहले ही पुनर्भरण संरचनाएं तैयार कर ली गई हैं ताकि वर्षा जल का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

जल निकाय पुनर्जीवन (डब्ल्यूबीआर) घटक के तहत देशभर में लगभग 1.21 लाख एकड़ क्षेत्र में फैले जलाशयों का पुनर्जीवन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत गाद निकासी, जल प्रवेश एवं निकास व्यवस्था में सुधार, तट संरक्षण, सौंदर्यीकरण और जैव विविधता संवर्धन जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल भंडारण क्षमता बढ़ाना, भूजल पुनर्भरण को मजबूत करना और शहरी बाढ़ के जोखिम को कम करना है।

मंत्रालय ने बताया कि जल संरक्षण प्रयासों के साथ-साथ देशभर में 18 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में पार्कों और हरित क्षेत्रों का भी विकास किया जा रहा है। ये परियोजनाएं पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने, भूजल पुनर्भरण में सहायता करने, शहरी गर्मी के प्रभाव को कम करने और नागरिकों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर