home page

‘सेवा तीर्थ’ गतिशीलता, निष्ठा और समाधान को बढ़ावा देगा, नये कार्यालय में मंत्रिमंडल की पहली बैठक

 | 
‘सेवा तीर्थ’ गतिशीलता, निष्ठा और समाधान को बढ़ावा देगा, नये कार्यालय में मंत्रिमंडल की पहली बैठक


नई दिल्ली, 24 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज प्रधानमंत्री के नये कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक प्रथम बैठक हुई। पहली बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर ‘सेवा तीर्थ’ की नई ऊर्जा और ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की तीव्र गति से भारत को निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने का दृढ़ संकल्प लिया गया।

इसमें कहा गया, “ ‘सेवा तीर्थ’ उस गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता का उत्तर है, जो जड़ता की जगह गतिशीलता को, उदासीनता की जगह निष्ठा को और संदेह की जगह समाधान को बढ़ावा देता है।”

पहली बैठक में पारित प्रस्ताव को केन्द्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में पढ़ा। इसमें कहा गया कि आज़ादी के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में आधुनिक और सामर्थ्य भारत का सपना देखा गया। अब ‘सेवातीर्थ’ में संकल्पना को साकार किया जाएगा।

प्रस्ताव में स्थान का इतिहास बताते हुए कहा गया है कि ‘सेवा तीर्थ’ उन अस्थायी बैरकों के स्थान पर बना है, जो ब्रिटिश काल के थे। उस स्थान पर राष्ट्र संचालन के सक्रिय संस्थान का निर्माण नए भारत के कायाकल्प का भी प्रतीक है।”

इसमें कहा गया कि ‘गुलामी के कालखंड से पहले भारत अपनी भौतिक भव्यता और मानवीय मूल्यों के लिए जाना जाता था। सेवातीर्थ की संकल्पना इन दोनों ही आदर्शों से मिलकर बनी है। मूल भावना है कि कर्तव्य, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी से यह कार्यस्थल एक तीर्थ की भांति पवित्र हो।‘

इसमें इस संकल्प को दोहराया गया कि ‘सेवा तीर्थ’ में हो रही इस पहली बैठक के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल का हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवाभाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा होगा।

साथ ही यह भी दोहराया गया कि ‘इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा। पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक संवेदनाओं के प्रति सजग गवर्नेंस मॉडल को और अधिक मजबूती दी जाएगी।‘

प्रस्ताव में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार फिर स्वयं को ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति समर्पित किया।

इसमें कहा गया कि ‘यह परिसर केवल आधुनिक कार्यस्थल नहीं है। यह शासन की नई कार्य-संस्कृति का भी प्रतीक है। यहां से चलने वाली प्रत्येक फाइल और यहां कार्य करने वाला प्रत्येक कर्मयोगी, इस भाव से प्रेरित होगा कि उसका कार्य देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने से जुड़ा है।‘

प्रस्ताव के अंत में कहा गया कि यह पहली बैठक इस विश्वास को और सुदृढ़ करती है कि सही नीति, नेक नीयत और सही नेतृत्व से विकसित भारत के निर्माण का पथ निरंतर प्रकाशित होता रहेगा।

------

हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा