कैबिनेट ने 2,584 करोड़ रुपये के लघु जल विद्युत (एसएचपी) विकास योजना’ को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर अगामी वित्त वर्ष 2030-31 की अवधि के लिए 1500 मेगावाट क्षमता वाली 2584.60 करोड़ रुपये के लघु जल विद्युत (एसएचपी) विकास योजना’ को मंजूरी दे दी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उक्त आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 'लघु जल विद्युत (एसएचपी) विकास योजना' को अपनी मंजूरी दे दी है। वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 1500 मेगावाट क्षमता वाली लघु जल विद्युत (एसएचपी) परियोजनाओं की स्थापना के लिए 2584.60 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना अलग-अलग राज्यों में छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट (1-25 मेगावाट क्षमता वाले) लगाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि इससे खास तौर पर पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों को फ़ायदा होगा, जहाँ ऐसे प्रोजेक्ट की बहुत ज्यादा संभावना है।
वैष्णव ने बताया कि इस योजना के तहत राज्यों को लगभग 200 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि भविष्य में लघु जलविद्युत परियोजनाओं की एक श्रृंखला तैयार हो सके। इस प्रकार की डीपीआर तैयार करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों को सहायता प्रदान करने हेतु 30 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से परियोजना निर्माण के दौरान 51 लाख व्यक्ति-दिवस का रोजगार सृजित होगा। इसके साथ ही ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थापित होने वाली इन एसएचपी (स्मॉल हैंड हीटर) परियोजनाओं के रखरखाव और संचालन में भी रोजगार सृजित होगा। एसएचपी परियोजनाएं विकेंद्रीकृत होने के कारण लंबी पारेषण लाइनों की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे पारेषण हानि भी कम होती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

