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हरिहरनाथ–मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा कल से, भारत-नेपाल की आस्था का बनेगी सेतु

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हरिहरनाथ–मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा कल से, भारत-नेपाल की आस्था का बनेगी सेतु


सारण, 12 अप्रैल (हि.स.)। बिहार के सारण जिले के सोनपुर से 13 अप्रैल (सोमवार) को हरिहरनाथ–मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है। यह सात दिवसीय यात्रा भारत और नेपाल की साझा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगी।

सोनपुर के ऐतिहासिक काली घाट से प्रारंभ होने वाली इस यात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह है। नगर को तोरण द्वारों और भगवा ध्वजों से सजाया गया है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो गया है।

वर्ष 2011 में शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य नारायणी गंडकी नदी के उद्गम स्थल मुक्तिनाथ धाम से लेकर संगम स्थल सोनपुर तक के प्राचीन सांस्कृतिक और पौराणिक संबंधों को पुनर्जीवित करना है।

यात्रा के महासचिव डॉ. आशुतोष कुमार ने जानकारी दी कि 13 अप्रैल को शाम 4 बजे से काली घाट पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन और लोकगीत प्रस्तुत कर आध्यात्मिक संदेश दिया जाएगा। साथ ही विद्वानों और संतों द्वारा सनातन धर्म एवं गंडकी महात्म्य पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

संध्या के समय वाराणसी की तर्ज पर गंडकी तट पर महाआरती का आयोजन होगा, जो इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी शामिल होंगे, जबकि समारोह की अध्यक्षता गोपाल नारायण सिंह करेंगे।

समारोह के विशिष्ट अतिथियों में केंद्रीय मंत्री सतीश चन्द्र दूबे, विधान परिषद के उपनेता प्रो. राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक, क्षेत्र कार्यवाह, प्रांत प्रचारक सहित कई विधायक और पार्षद शामिल होंगे।

इस कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानुजाचार्य लक्ष्मणाचार्य जी महाराज, मौनी बाबा और महामंडलेश्वर शिवेश्वर महादेव भारती जैसे संतों का सानिध्य प्राप्त होगा।

यह यात्रा सोनपुर से निकलकर केशरिया, बेतिया, बगहा और वाल्मीकि नगर होते हुए नेपाल में प्रवेश करेगी। नेपाल के पोखरा और बेणी गलेश्वर धाम में भी भव्य आरती का आयोजन होगा।

18 अप्रैल को सुबह 9 बजे श्रद्धालु मुक्तिनाथ धाम में भगवान के विशेष दर्शन करेंगे और 19 अप्रैल को यात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंडकी तट पर गज और ग्राह का प्रसिद्ध युद्ध हुआ था, जहां भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की थी। मुक्तिनाथ से निकलने वाली सालिग्रामी नदी और हरिहरनाथ मंदिर का संगम स्थल सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

यात्रा समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पुण्य यात्रा में शामिल होकर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के इस महत्वपूर्ण आयोजन का हिस्सा बनें।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार