home page

बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों के 10.26 लाख लोग प्रभावित, राहत-बचाव कार्य तेज

 | 
बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों के 10.26 लाख लोग प्रभावित, राहत-बचाव कार्य तेज


पटना, 05 सितम्बर (हि.स.)। बिहार में नदियों के बढ़े जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट है। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं। राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में करीब 10.26 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।

बाढ़ प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 50 चिकित्सा शिविर, 19 वोट एम्बुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं। विस्थापित और प्रभावित लोगों के आवागमन तथा सुरक्षित निकासी के लिए 858 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। वहीं, प्रभावित परिवारों के बीच अब तक 12 हजार से अधिक पॉलीथीन शीट और करीब 2,300 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

बाढ़ प्रभावित लोगों को दोनों समय गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 1.21 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है। इसके अलावा वैशाली जिले में एक राहत शिविर चलाया जा रहा है, जहां करीब 326 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

संभावित खतरों से निपटने और त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए राज्य के विभिन्न प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ की सात और एसडीआरएफ की 27 टीमें, यानी कुल 34 टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है।

पटना के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर, बंका घाट में 49.45 मीटर और पंडारक में 43.79 मीटर दर्ज किया गया है। इन स्थानों पर गंगा का जलस्तर सर्वोच्च बाढ़ स्तर (एचएफएल) से ऊपर बह रहा है। इसके अलावा गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा नदियां भी विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं।

सारण जिले में माही नदी के त्रिलोकचक के पास करीब 20 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर एसडीआरएफ की टीम भेजी गई है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 1.26 लाख क्यूसेक, बीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव 1.77 लाख क्यूसेक और इन्द्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 3.07 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया है।

बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने पूरे राज्य में बाढ़ की स्थिति पर लगातार और सूक्ष्म निगरानी बनाए रखी है।

पटना में बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए शहर के सभी 56 डीपीएस चालू रखे गए हैं। इसके अलावा पटना नगर निगम के छह अंचलों में 94 अतिरिक्त पंप, जिनकी क्षमता 7.5 एचपी से 83 एचपी तक है, जलनिकासी के लिए लगाए गए हैं।

शहर में जलनिकासी पर दबाव कम करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा पटना और दानापुर कैनाल में डिस्चार्ज बंद करने की प्रक्रिया की जा रही है। वहीं, गंगा से नालों में बैकफ्लो रोकने के लिए 13 छोटे नालों के स्लूस गेट बंद कर दिए गए हैं। नालों से पानी की निकासी तेज करने के लिए पटना नगर निगम की ओर से पंप सेट भी लगाए जा रहे हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मौसम तथा नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी