भारत-नेपाल सीमा पर नकली दस्तावेज़ों के सहारे नेपाल में प्रवेश की कोशिश करते हुए दो थाई महिलाएं गिरफ्तार
किशनगंज, 29 मई (हि.स.)। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गलगलिया क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सीमा पार करने की कोशिश कर रहे एक संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पानीटंकी बॉर्डर चेकपोस्ट पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और इमिग्रेशन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में थाईलैंड की दो महिला नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी इमिग्रेशन एग्जिट स्टैम्प के सहारे नेपाल जाने की कोशिश कर रही थीं।
सुरक्षा आधिकारियों के अनुसार, 41वीं वाहिनी एसएसबी रानीडांगा की बॉर्डर इंटरैक्शन टीम (बीआईटी ) ने कमांडेंट विकास कुमार के नेतृत्व में पानीटंकी स्थित न्यू ब्रिज चेकपोस्ट पर सघन जांच अभियान चलाया। सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को और कड़ा किया गया था। इसी दौरान नेपाल की ओर जा रही एक संदिग्ध सफेद रंग की स्विफ्ट कार को रोककर उसमें सवार लोगों से पूछताछ की गई और उनके यात्रा दस्तावेजों की जांच शुरू की गई।
कार में मौजूद दो विदेशी महिलाओं के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज संदिग्ध लगने पर उन्हें तत्काल इमिग्रेशन अधिकारियों के पास सत्यापन के लिए भेजा गया। जांच प्रक्रिया शुरू होते ही महिलाओं के साथ मौजूद एक कथित कूरियर एजेंट को शक हो गया कि मामला उजागर हो चुका है। इसके बाद वह मौके का फायदा उठाकर चेकपोस्ट से फरार हो गया। हालांकि, उसकी तस्वीरें और वाहन की गतिविधियां वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब फुटेज के आधार पर उसकी पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हैं।
इमिग्रेशन विभाग द्वारा पासपोर्ट की बारकोड स्कैनिंग और केंद्रीय डेटाबेस से मिलान करने पर बड़ा खुलासा हुआ। दोनों महिलाओं के पासपोर्ट पर लगे भारत से बाहर जाने के एग्जिट स्टैम्प पूरी तरह फर्जी पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि जिन नंबरों के आधार पर स्टैम्प लगाए गए थे, उनसे संबंधित कोई वैध अनुमति केंद्रीय इमिग्रेशन कार्यालय की ओर से जारी ही नहीं की गई थी। इससे स्पष्ट हो गया कि दस्तावेजों में सुनियोजित तरीके से जालसाजी की गई थी।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान थाईलैंड निवासी पिमचानोक केटला और चिंतरा बुद्धाफोंग के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्हें दिल्ली और कोलकाता के रास्ते सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचाया गया था। उन्होंने बताया कि एक संगठित गिरोह ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें सुरक्षित रूप से नेपाल सीमा पार कराने का भरोसा दिया था।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यह मामला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी, अवैध आव्रजन और अन्य संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि महिलाओं को भारत में किस उद्देश्य से लाया गया था और नेपाल के रास्ते उन्हें आगे कहां भेजे जाने की योजना थी।
फरार एजेंट की तलाश में केंद्रीय खुफिया एजेंसियां, एसएसबी और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। सीमा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी प्रमुख चेकपोस्टों पर जांच और सख्त कर दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों का भी खुलासा हो सकता है।----------
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

