home page

कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा कर रही है : सुधांशु त्रिवेदी

 | 
कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा कर रही है : सुधांशु त्रिवेदी


-जंगलों से सिमट रहा नक्सलवाद, अब दिल्ली में विचारधारा को मंच देने का प्रयास : भाजपा

भुवनेश्वर, 02 नवंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने, राजनीतिक असफलताओं को छिपाने और देश में अराजकता का माहौल बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद अब जंगलों से समाप्त हो रहा है, लेकिन उसकी विचारधारा को नए रूप में दिल्ली में मंच देने का प्रयास किया जा रहा है।

भुवनेश्वर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में सोमवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कांग्रेस के कथित 'मॉक पार्लियामेंट' कार्यक्रम, विपक्ष की राजनीति और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर विस्तार से अपनी बात रखी। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, प्रदेश महामंत्री बिरंची नारायण त्रिपाठी भी उपस्थित थे ।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस का मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने का तरीका नक्सलियों की उस पुरानी व्यवस्था की याद दिलाता है, जिसमें वे अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में अलग संसद, अदालत और तथाकथित 'जनता सरकार' चलाने का दावा करते थे। उनके अनुसार, कांग्रेस आज उसी तरह की राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित मॉक पार्लियामेंट में विपक्षी विचारों और दूसरे पक्ष के लिए जगह कहां थी? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मंशा ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जहां केवल एक पक्ष की बात सुनी जाए। उन्होंने इसकी तुलना आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में डालने की घटना से भी की।

राहुल गांधी पर काम से बचने और राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं निभाने का आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी पर राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से विपक्ष में है, लेकिन उसके नेता जनता के बीच सक्रिय रूप से काम करते हुए दिखाई नहीं देते। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वहां 25 दिन रहने की बात कही थी, जबकि राहुल गांधी किसी विधानसभा चुनाव में लगातार इतने दिनों तक सक्रिय प्रचार करते हुए दिखाई नहीं देते।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता मेहनत करने के बजाय नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करते हैं। उनके अनुसार, इसी कारण पार्टी देश के सामने अपनी राजनीतिक भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रही है।

राम, शिव और शक्ति को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर निशाना

डॉ. त्रिवेदी ने रामलीला मैदान में कांग्रेस नेताओं की ओर से दिए गए धार्मिक संदर्भों और राहुल गांधी के पूर्व बयानों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता कभी स्वयं को शिव की बारात से जोड़ते हैं तो कभी पांडवों का उल्लेख करते हैं, लेकिन उनके बयानों में धार्मिक प्रतीकों के प्रति वास्तविक समझ दिखाई नहीं देती। क्योंकि बारात में तांडब नहीं होता।

उन्होंने राहुल गांधी के उस पुराने बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्म में निहित शक्ति से लड़ने की बात कही थी। त्रिवेदी ने कहा कि शिव और शक्ति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। शक्ति के अधिष्ठान से ही शिव परमेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान राहुल गांधी की भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति सोच को दर्शाते हैं।

एलआईसी, एसबीआई और एचएएल को लेकर कांग्रेस के आरोपों का दिया जवाब

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस पिछले 12 वर्षों से देश की विभिन्न संवैधानिक और आर्थिक संस्थाओं के प्रति लोगों में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), कभी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और कभी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 2018 में एलआईसी के डूबने की आशंका जताई थी, जबकि बाद के वर्षों में कंपनी ने बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया। इसी तरह एसबीआई को लेकर भी नकारात्मक दावे किए गए, लेकिन आज वह देश के प्रमुख वित्तीय संस्थानों में शामिल है। एचएएल के संबंध में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कंपनी को कमजोर करने का आरोप लगाया था, जबकि उसके पास लगभग एक लाख करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं।

त्रिवेदी ने कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन के निर्यात को लेकर कांग्रेस के सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने टीकाकरण और वैक्सीन आपूर्ति को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, कांग्रेस ने समय-समय पर भारतीय सेना, वायुसेना और रक्षा अभियानों को लेकर भी सवाल उठाकर देश की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश की।

संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रीय प्रसारण सेवा पर सवाल उठाने का आरोप

डॉ. त्रिवेदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के परिसर में विपक्षी नेताओं के प्रवेश, प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन और सर्वोच्च न्यायालय से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और सार्वजनिक व्यवस्था के प्रति मर्यादा बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राहुल गांधी के गले मिलने के बाद सदन में किए गए इशारों का भी उल्लेख किया और कहा कि इस तरह के आचरण से राजनीतिक गंभीरता पर सवाल उठते हैं।

बांग्लादेश और वामपंथी संगठनों को लेकर कांग्रेस पर हमला

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के कुछ युवा नेताओं और वामपंथी संगठनों से जुड़े लोगों के साथ उसके राजनीतिक मंच साझा करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में कांग्रेस बांग्लादेश के गठन के समय भारत की भूमिका का उल्लेख करती थी, लेकिन आज पार्टी ऐसे नेताओं को अपने साथ खड़ा कर रही है, जिनके बयानों में बांग्लादेश से संबंधित विवादास्पद संदर्भ सामने आते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे संगठनों और नेताओं को राजनीतिक महत्व दे रही है, जिनकी विचारधारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के बजाय सशस्त्र संघर्ष से जुड़ी रही है। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की छात्र इकाई से जुड़े कुछ नेताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस प्रकार की राजनीतिक विचारधारा के साथ खड़ी है।

1999 के विश्वास मत और 1991 के चुनाव का किया उल्लेख

ओडिशा की धरती से अपने संबोधन में डॉ. त्रिवेदी ने वर्ष 1999 में केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के विश्वास मत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 1999 में लोकसभा में एक वोट से सरकार गिर गई थी। उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री गिरिधर गोमांग ने लोकसभा सदस्य के रूप में मतदान किया था। त्रिवेदी ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हुए और सितंबर-अक्टूबर 1999 में लोकसभा चुनाव कराए गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनावी सहानुभूति के राजनीतिक लाभ को प्रभावित करने के उद्देश्य से चुनाव की समय-सारणी को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल और बाद में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया।

इसी क्रम में उन्होंने वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव का संदर्भ देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी, जबकि चुनाव संबंधी नियमों के अनुसार किसी उम्मीदवार की मृत्यु होने पर सामान्यतः संबंधित लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र का चुनाव स्थगित किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय चुनाव स्थगित होने के बाद कांग्रेस को सहानुभूति का राजनीतिक लाभ मिला।

त्रिवेदी ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी और तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवीन चावला के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय 200 से अधिक सांसदों ने भी इस मामले में राष्ट्रपति को पत्र लिखा था।

चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीतिक दुष्प्रचार

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आज चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित हो रही है, इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी राज्य में एक ही पार्टी की सरकार लगातार दोबारा या तीसरी बार सत्ता में आती है, तो उसे लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं?

उन्होंने दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल और पंजाब का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें लगातार सत्ता में लौटती रही हैं। ऐसे में किसी एक दल की सरकार के दोबारा चुने जाने पर संदेह जताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता का जनादेश ही लोकतंत्र का आधार है।

डॉ. त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के भविष्य और विकसित भारत के निर्माण की बात कर रहे हैं, जबकि विपक्ष के कई नेताओं का राजनीतिक लक्ष्य अपने परिवार के सदस्यों के भविष्य और राजनीतिक उत्तराधिकार तक सीमित है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को देश के विकास, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता दिखानी चाहिए। राजनीतिक विरोध के नाम पर देश में अव्यवस्था और अराजकता पैदा करने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

यूरोप के हालात का उल्लेख कर अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों पर उठाए सवाल

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में भाजपा प्रवक्ता ने यूरोप के कई देशों में जारी विरोध प्रदर्शनों और सामाजिक असंतोष का उल्लेख किया। उन्होंने ब्रिटेन, स्पेन, फ्रांस, इटली और बेल्जियम जैसे देशों का संदर्भ देते हुए कहा कि वहां भी लोग आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने खुशी सूचकांक और स्वतंत्रता सूचकांक जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन देशों को इन सूचकांकों में बेहतर स्थिति वाला बताया जाता रहा है, वहां भी आम नागरिक बुनियादी समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि या तो यह सूचकांक के आंकडे झूठे थे या फिर जो आंदोलन हो रहे हैं, वे अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र का हिस्सा है और उसी षडयंत्र का शिकार भारत को बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि देशवासियों को ऐसे घटनाक्रमों की गंभीरता समझनी चाहिए और राजनीतिक दुष्प्रचार तथा संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने वाले प्रयासों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो