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ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के प्रमुखों की बैठक 3-4 अगस्त काे लखनऊ में

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ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के प्रमुखों की बैठक 3-4 अगस्त काे लखनऊ में


- परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी महत्वपूर्ण

लखनऊ, 02 अगस्त (हि.स.)। ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की बैठक भारत की अध्यक्षता में 3 से 4 अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित होने वाली है। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं।

ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, थिंक टैंकों, नागरिक समाज संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ, ब्रिक्स राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की बैठक के साथ-साथ निम्नलिखित विषयों पर आधे दिन के दो सह-कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें 3 अगस्त काे प्रशासनिक डेटा की क्षमता को उजागर करना तथा 4 अगस्त काे विकसित होते डेटा पारिस्थितिकी तंत्र में एआई की तैयारी जैसे मुद्दाें पर चर्चा हाेगी। इस बैठक में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इसका उद्देश्य ब्रिक्स जेएसपी के माध्यम से सांख्यिकी के प्रसार, सांख्यिकी प्रणालियों में नवाचार और ज्ञान एवं सर्वोत्तम परिपाटियों के आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है

आयाेजन से जुड़े एक अधिकारी ने रविवार काे बताया कि वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण (ब्रिक्स) के व्यापक विषय द्वारा निर्देशित है। ब्रिक्स सांख्यिकी ट्रैक के अंतर्गत, भारत ने परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी विषय को अपनाया है। यह डेटा की गुणवत्ता, नवाचार, प्रभावी प्रसार और जन-केंद्रित सांख्यिकीय प्रणालियों के लिए अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह तीव्र तकनीकी प्रगति, उच्च आवृत्ति एवं विस्तृत डेटा की बढ़ती मांग और साक्ष्य-आधारित, टिकाऊ और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए आधिकारिक सांख्यिकी पर बढ़ती निर्भरता के प्रति उत्तरदायी हैं।

आधुनिक ब्रिक्स नीति निर्माण विकास पर नज़र रखने, निर्णयों का मार्गदर्शन करने और आपसी समझ बनाने के लिए मज़बूत आंकड़ों पर निर्भर करता है। वर्ष 2010 से, सदस्य देशों ने सुलभ, सामंजस्यपूर्ण डेटा प्रदान करने के लिए संयुक्त सांख्यिकी प्रकाशन (जेएसपी) और स्नैपशॉट ब्रिक्स जेएसपी (2020 में प्रस्तुत) प्रकाशित किए हैं। समय के साथ, ब्रिक्स सांख्यिकी सहयोग बुनियादी डेटा संग्रह से आगे बढ़कर नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए डेटा मानकों, सामंजस्य और नवाचार पर गहन समन्वय की ओर विकसित हुआ है। सांख्यिकी मामलों पर दो मुख्य कार्यक्रम प्रति वर्ष आयोजित किए जाते हैं । इसके साथ ही एनएसओ की तकनीकी बैठक व एनएसओ के प्रमुखों की बैठक भी हाेती है।

उल्लेखनीय है कि तकनीकी बैठक 16 अप्रैल से 17 अप्रैल, 2026 के दौरान हुई। यह बैठक मुख्य रूप से ब्रिक्स जेएसपी और स्नैपशॉट ब्रिक्स जेएसपी के अध्यायों पर चर्चा को सुविधाजनक बनाने के लिए आयोजित की गई थी। चर्चा का केंद्र बिंदु जेएसपी और स्नैपशॉट 2026 के लिए पारस्परिक रूप से सहमत ढांचा विकसित करना था। इसके साथ ही प्रत्येक राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) से जिम्मेदारियों का आवंटन निर्धारित करना और उनके योगदान के लिए समयसीमा तय करना भी इसका उद्देश्य था।

उन्हाेंने बताया कि ब्रिक्स सांख्यिकी ट्रैक का उद्देश्य ब्रिक्स के प्रमुख सांख्यिकीय उत्पादों (जेएसपी और स्नैपशॉट) को सुदृढ़ बनाना, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में नवाचार और सुधार, डेटा प्रसार और पहुंच, व्यापक आर्थिक एवं क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ बनाते हुए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के अंतर्गत परिणाम प्रदान करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह