नई तकनीक से होगा जंगलों का बेहतर आकलन, स्वदेशी तकनीक अपनाने पर जोर
नई दिल्ली, 10 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत को जंगलों और पेड़ों का सही आकलन करने के लिए आधुनिक और स्वदेशी तकनीकों का अधिक उपयोग करना चाहिए। जंगलों की सुरक्षा और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए मजबूत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और एक समान मापदंड जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से जंगलों से जुड़े आंकड़े अधिक सटीक होंगे और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद मिलेगी। गुरुवार को नई दिल्ली में ‘वन और वृक्ष संसाधनों के आकलन में नवीनतम प्रौद्योगिकियों का लाभ’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत वर्ष 1987 से भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के माध्यम से हर दो साल में देश के वन और वृक्ष संसाधनों का आकलन कर रहा है। यह रिपोर्ट देश में जंगलों की स्थिति और बदलाव का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बार-बार आग लगने वाले वन क्षेत्रों की पहचान कर उनके लिए अलग रणनीति बनाई जानी चाहिए। साथ ही आर्द्रभूमि (वेटलैंड), जंगल और घास के मैदानों के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि जैव विविधता सुरक्षित रह सके।
उन्होंने वन कर्मचारियों के प्रशिक्षण, स्वदेशी तकनीक के विकास और बेहतर गुणवत्ता वाले डेटा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2035 तक 3.5 से 4 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य कार्बन सिंक तैयार करना है, जिसे तकनीकी नवाचार, मजबूत नीतियों और लोगों की भागीदारी से ही हासिल किया जा सकता है।
कार्यशाला में राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें वन सीमाओं के डिजिटलीकरण, वन एवं वृक्ष आवरण के आकलन और कार्बन स्टॉक के अनुमान जैसे विषयों पर चर्चा की गई। केंद्र सरकार ने कहा कि हरित भारत मिशन, मिष्टी, नगर वन योजना, नमो वन और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी योजनाओं के जरिए राज्यों को लगातार तकनीकी और वित्तीय सहायता दी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

