भूपेन हजारिका के कोलकाता स्थित घर को स्मारक के रूप में संरक्षित करने की पहल, असम सरकार की टीम ने किया निरीक्षण
कोलकाता, 6 सितंबर (हि.स.)। भारत रत्न और महान गायक-संगीतकार भूपेन हजारिका की जन्मशती के अवसर पर उनके कोलकाता स्थित पुराने आवास को स्मृति स्थल के रूप में संरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में असम सरकार के एक उच्चस्तरीय दल ने रविवार को दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज स्थित उस भवन का निरीक्षण किया, जहां भूपेन हजारिका ने अपने जीवन के कई वर्ष बिताए थे। दल ने पश्चिम बंगाल सरकार और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ समन्वय कर भवन के प्रथम तल के एक कमरे को संरक्षित करने की संभावनाओं पर विचार किया।
असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. कल्याण चक्रवर्ती ने कहा कि भूपेन हजारिका से जुड़ा यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ मिलकर कमरे के जीर्णोद्धार और संरक्षण की संभावनाएं तलाश की जा सकें।
टॉलीगंज के गोल्फ क्लब रोड स्थित 77 बी नंबर के तीन मंजिला भवन की पहली मंजिल पर भूपेन हजारिका शुरुआत में किरायेदार के रूप में रहते थे। बाद में उन्होंने वर्ष 1981 में यह संपत्ति खरीद ली थी। हालांकि, 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में उन्होंने इसे बेच दिया और मुंबई चले गए। असम एसोसिएशन से जुड़े त्रिदिब शर्मा ने बताया कि वर्तमान में इस संपत्ति के कई मालिक हैं और अलग-अलग परिवार यहां रहते हैं। ऐसे में इसे स्मारक में बदलने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
त्रिदिब शर्मा के अनुसार, यह मकान केवल भूपेन हजारिका का आवास नहीं था, बल्कि उस दौर में संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा। लता मंगेशकर और मन्ना डे जैसी महान हस्तियां भी यहां आती थीं। भूपेन हजारिका ने असमिया, बंगाली और हिंदी सहित कई भाषाओं में गीतों को अपनी आवाज दी और संगीत के माध्यम से विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का काम किया।
उन्होंने कहा कि असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के कार्यकाल में भी इस स्थान को स्मारक के रूप में विकसित करने की पहल की गई थी, लेकिन इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से इस दिशा में आगे कदम उठाया जाएगा।
असम सरकार के अधिकारी ने कहा कि भवन के प्रथम तल पर स्थित भूपेन हजारिका के बैठक कक्ष को संरक्षित कर स्मारक के रूप में विकसित करने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हजारिका का संगीत भाषाई और सामाजिक सीमाओं से परे था। उन्होंने जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर अपनी कला के माध्यम से लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का संदेश दिया।
अधिकारी ने कहा कि कोलकाता और बंगाल ऐतिहासिक रूप से भारतीय कला और संस्कृति के प्रमुख केंद्र रहे हैं। ऐसे में भूपेन हजारिका जैसे महान कलाकार से जुड़े स्थान का जीर्ण-शीर्ण स्थिति में रहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हजारिका का बंगाल और यहां की संस्कृति से गहरा लगाव था और उनके लाखों प्रशंसक आज भी यहां मौजूद हैं।
असम सरकार ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे को पश्चिम बंगाल प्रशासन के समक्ष औपचारिक रूप से उठाया जाएगा। भूपेन हजारिका की जन्मशती के अवसर पर देशभर में उनके योगदान को याद करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को कोलकाता में भी विशेष संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
असम सरकार के अनुसार, भूपेन हजारिका का लोक संगीत से प्रभावित सृजन आज भी असम, बंगाल और पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। उनके कोलकाता स्थित पुराने आवास को स्मारक के रूप में संरक्षित करने की पहल उनके इसी व्यापक सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

