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भगवा वेश में संसद में किए गए नाटकीय प्रदर्शन के विरोध में अयोध्या के संतों का आक्रोश मार्च, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

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भगवा वेश में संसद में किए गए नाटकीय प्रदर्शन के विरोध में अयोध्या के संतों का आक्रोश मार्च, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन


भगवा वेश में संसद में किए गए नाटकीय प्रदर्शन के विरोध में अयोध्या के संतों का आक्रोश मार्च, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन


अयोध्या, 01 अगस्त (हि.स.)। संसद भवन परिसर में 31 जुलाई को सांसद राजेश रंजन (पप्पू यादव ) द्वारा भगवा वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन को लेकर अयोध्या के संत समाज में तीखी नाराजगी है। संतों ने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम से सनातन धर्म, साधु-संत परंपरा और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की गरिमा का अपमान हुआ है।

इसी के विरोध में शनिवार को श्री संकट मोचन हनुमान किला से मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महंत राजकुमार दास, महंत गौरीशंकर दास एवं महंत परशुराम दास के नेतृत्व में संतों ने विशाल विरोध मार्च निकाला। मार्च नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। इस दौरान संतों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, सांसद पप्पू यादव तथा अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर अपना रोष प्रकट किया। इसके उपरांत जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित नेताओं के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में संतों ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में भगवा वेश धारण कर किया गया प्रदर्शन सुनियोजित ढंग से सनातन संस्कृति, संत परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को आहत करने वाला कृत्य है। उनका कहना था कि इससे साधु-संत समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया तथा भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। संतों ने सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद राहुल गांधी, अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद एवं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की।

संतों ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में समर्पण राशि से जुड़े प्रकरण की जांच वर्तमान में प्रचलित है। ऐसे समय संसद परिसर में किया गया यह प्रदर्शन जांच को प्रभावित करने तथा श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास प्रतीत होता है। उनका आरोप था कि इस घटनाक्रम से संत समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और श्रावण मास में झूला महोत्सव के दौरान आश्रमों में होने वाले श्रद्धालुओं के समर्पण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे धार्मिक संस्थाओं को आर्थिक क्षति होने की आशंका है।

संत समाज ने मांग की कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यदि इस घटनाक्रम से धार्मिक संस्थाओं को आर्थिक नुकसान होता है तो उसकी भरपाई कराई जाए। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से भी संबंधित सांसदों की सदस्यता समाप्त करने के लिए संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने की मांग की गई। प्रदर्शन में महंत श्याम सुंदर दास, महंत बालक दास, मंसाराम की शरण, उत्तराधिकारी मुन्ना दास, महंत अवध रामदास, महंत अवनीश दास, आचार्य सर्वेंद्र, स्वामी देवेशाचार्य, महंत अवधेश दास शास्त्री, सत्यम दास, अविरल सिंह, महंत रामस्वरूप दास, दीपक, विशाल, आचार्य मोहित दास, रघुवर दास सहित बड़ी संख्या में संत, महंत एवं श्रद्धालु शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय