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अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान लौटा 49 सिख श्रद्धालुओं का जत्था

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- हवाई यात्रा का खर्च बचने से श्रद्धालुओं ने जताया आभार

अमृतसर, 05 नवंबर (हि.स.)। पाकिस्तान से भारत में धार्मिक यात्रा पर आया 49 सिख श्रद्धालुओं का जत्था अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते अपने वतन लौट गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हस्तक्षेप के बाद श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से पाकिस्तान लौटने की विशेष अनुमति दी। इससे श्रद्धालुओं को हवाई यात्रा पर होने वाले भारी खर्च से राहत मिली। इस जत्थे में पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब के श्रद्धालु शामिल थे।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद एक 1 मई, 2025 से अटारी-वाघा सीमा सामान्य यात्रियों के लिए बंद है। वर्तमान में केवल निर्धारित धार्मिक अवसरों पर भारत-पाकिस्तान के बीच 1974 के धार्मिक तीर्थयात्रा प्रोटोकॉल के तहत श्रद्धालुओं को आने-जाने की अनुमति दी जाती है।

पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु 8 अक्टूबर को लाहौर-ताशकंद-नई दिल्ली हवाई मार्ग से भारत पहुंचे थे। उनके वीजा की अवधि 6 नवंबर को समाप्त होनी थी और पहले उनकी वापसी हवाई मार्ग से निर्धारित थी। डीएसजीएमसी के मुख्य सलाहकार (एनआरआई मामलों) परमजीत सिंह चंडोक ने श्रद्धालुओं की वापसी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से विशेष अनुमति और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

जत्थे के प्रमुख पपिंदर सिंह ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दुनियाभर के सिख उन ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने की इच्छा रखते हैं, जो 1947 के विभाजन के बाद सीमाओं के दूसरी ओर रह गए। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को श्री हरमंदिर साहिब में श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके अलावा जत्थे के लगभग 40 श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन भी किए।

श्रद्धालुओं ने दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब, रकाब गंज साहिब, सीस गंज साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेका। इसके अलावा आनंदपुर साहिब स्थित तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब में भी हाजिरी भरी। जत्थे के कई सदस्यों ने भारत में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से भी मुलाकात की।

पपिंदर सिंह ने कहा कि अटारी-वाघा सड़क मार्ग से वापसी की अनुमति मिलने से यात्रा काफी आसान और किफायती हो गई। श्रद्धालुओं ने अपने वापसी के हवाई टिकट रद्द कर दिए हैं और अब उन्हें टिकटों की राशि वापस मिलने की उम्मीद है। परमजीत सिंह चंडोक ने बताया कि श्रद्धालुओं के इस्तेमाल नहीं हुए हवाई टिकटों की राशि वापस दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH