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पूर्वोत्तर में भारतीय रेल का भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से होगा सीधा संपर्क, सुरक्षा को लेकर एआई की उपयोग

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पूर्वोत्तर में भारतीय रेल का भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से होगा सीधा संपर्क, सुरक्षा को लेकर एआई की उपयोग


- 2029 तक सभी राज्यों की राजधानियां जुड़ेंगी रेल नेटवर्क से, अंतर्राष्ट्रीय संपर्क पर भी जोर

गुवाहाटी, 14 सितंबर (हि.स.)। पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे तेजी से विकास कर रहा है। रेलवे लाइनें बिछाई जा रही हैं। नए स्टेशन बनाए जा रहे हैं। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से एआई का इस्तमाल भी शुरू किया जा रहा है। भारत की सीमा से जुड़े राष्ट्रों भूटान, नेपाल और बांग्लादेश में भी भारतीय रेल की पहुंच स्थापित हो रही है।

पूर्वोत्तर रीजन में भारतीय रेल 70 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मूर्त रूप देने में जुटा है।

'एक भारत श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश के पत्रकारों का एक दल रविवार से पूर्वोत्तर भ्रमण पर है। सोमवार को पत्रकारों के इस दल ने मालीगांव स्थित

भारतीय रेलवे के अंतर्गत पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) हेड क्वार्टर का भ्रमण किया।

पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले 12 वर्षों में रेलवे के बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास हुआ है। वर्ष 2014 से पहले इस क्षेत्र में विद्युतीकरण शून्य था, लेकिन अब यह शत-प्रतिशत पूरा होने के करीब है। रेलवे ने 2029 तक पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की राजधानियों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने और पड़ोसी देशों के साथ रेल संपर्क (कनेक्टिविटी) को मजबूत करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।

रेलवे की ओर से दी गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, पिछले एक दशक में क्षेत्र में लगभग दो हजार किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं। पिछले साल 13 सितंबर को बैराबी-सैरांग परियोजना के माध्यम से मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहली बार ट्रेन पहुंची थी। इसी क्रम में रेलवे की योजना 2027 तक सिक्किम (सेवोक-रंगपो प्रोजेक्ट), 2028 तक मणिपुर (इंफाल) और 2029 तक नागालैंड को पूरी तरह रेल नेटवर्क से जोड़ने की है।

उल्लेखनीय है कि 1903 में दीमापुर स्टेशन बनने के लगभग सौ साल बाद, 2022 में नागालैंड को शोखुवी के रूप में अपना दूसरा स्टेशन मिला है।

पड़ोसी देशों से मजबूत होगा व्यापार और पर्यटन

एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी केके शर्मा ने पत्रकारों के साथ एक चर्चा में बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सीमावर्ती देशों के साथ भी तेजी से काम चल रहा है। भूटान के साथ बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू रेल परियोजनाओं को हाल ही में मंजूरी मिली है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है। इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे भारत और भूटान के बीच व्यापार व पर्यटन को नई गति मिलेगी। इसके अलावा, नेपाल के लिए जोगबनी से पहली कंटेनर ट्रेन चलाई जा चुकी है, जिसे विराटनगर तक विस्तारित किया जा रहा है।

वहीं, बांग्लादेश के साथ अगरतला-अखौरा प्रोजेक्ट का निर्माण भौतिक रूप से पूरा हो चुका है, जबकि महिषासन जीरो पॉइंट पर भी काम अंतिम चरण (केवल 170 मीटर शेष) में है।

हाथियों व वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 'आईडीएस' तकनीक

एनएफआर ने बताया कि विकास की इस दौड़ में रेलवे वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। पूर्वोत्तर में 226 किलोमीटर लंबे एलीफेंट कॉरिडोर (हाथी गलियारे) में रेल हादसों को रोकने के लिए एआई आधारित 'इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम' (आईडीएस) लगाया जा रहा है। यह तकनीक हादसों को रोकने में बेहद सफल साबित हुआ है।

इसके साथ ही, हूलोंगापार वन्यजीव अभयारण्य में रेलवे ट्रैक के ऊपर विशेष 'कैनोपी ब्रिज' बनाए गए हैं, ताकि वहां पाए जाने वाले गिबन्स सुरक्षित रूप से ट्रैक पार कर सकें।

बजट और पुरानी परियोजनाओं को मिली नई रफ्तार

पूर्वोत्तर में 2014 से पहले और उसके बाद के रेलवे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि 2007 से 2010 के बीच कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिली। बजट नहीं मिल पाने की वजह से कार्य आगे नहीं बढ़ सका। स्वीकृत कई पुरानी परियोजनाओं को 2015-16 के बाद प्रमुखता से बजट दिया गया, जिससे उनके काम में तेजी आई। वर्तमान में नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) में कुल 73 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली लगभग 20 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। केवल इस वर्ष के लिए रेलवे को 11 हजार 488 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, सिलीगुड़ी कॉरिडोर के सामरिक महत्व को देखते हुए अलुआबाड़ी से न्यू जलपाईगुड़ी तक तीसरी और चौथी लाइन तथा दोहरीकरण का काम भी तेजी से किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट-हिली प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है।

2029 तक पूर्वोत्तर राज्यों के रेल नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव (मेजर ट्रांसफॉर्मेशन) देखने को मिलेगा, जो देश की सामरिक सुरक्षा और यात्री सुविधाओं, दोनों ही लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला