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प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर अपनी भूमिका को फिर से दोहराया

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प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर अपनी भूमिका को फिर से दोहराया


गुवाहाटी, 26 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर अपनी भूमिका को दोहराया है। उन्होंने इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को बढ़ावा देने और लोकप्रिय बनाने में लगातार अग्रणी भूमिका निभाई है। अपने बेहद लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत में बांस उद्योग की अपार संभावनाओं और उसके आर्थिक भविष्य पर प्रकाश डाला।

असम प्रदेश भाजपा मुख्यालय, 'अटल बिहारी वाजपेयी भवन' से जारी बयान अनुसार, असम के 39 संगठनात्मक जिलों के 433 मंडलों में फैले 30,000 से अधिक बूथों पर 30 लाख से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस प्रसारण को सुना।

बयान में बताया गया है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे पूर्वोत्तर के लोग बांस की खेती के जरिए आत्मनिर्भरता हासिल कर रहे हैं। उन्होंने त्रिपुरा के गोमती जिले के बिजोय सूत्रधार और दक्षिण त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती जैसे प्रेरणादायक उदाहरणों का जिक्र किया, जिन्होंने बांस से बनी हस्तशिल्प और सजावटी चीज़ों के साथ वैश्विक बाजारों में सफलतापूर्वक अपनी जगह बनाई है।

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे नगालैंड के युवा बांस की कोंपलों से कई तरह के खाद्य उत्पाद बना रहे हैं, जबकि मिजोरम के किसान खेती के लिए ग्रीनहाउस बनाने में बांस का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने सिक्किम के गंगटोक में लगास्ट बंबू एंटरप्राइज के सदस्यों का भी ज़िक्र किया, जो विश्व-स्तरीय हस्तनिर्मित बांस उत्पाद बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत के नागरिकों और वैश्विक समुदाय को बांस के उत्पाद खरीदने और उन्हें दोस्तों और परिवार के लिए एक सार्थक उपहार के तौर पर देने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के बीच पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में इस कार्यक्रम को सुना।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने पूर्वोत्तर में बांस अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर जाेर देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अपनी बांस-आधारित संरचनाओं के साथ, इस क्षेत्र के फलते-फूलते बांस उद्योग का एक जीता-जागता प्रमाण है।-------------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय