भारत ने चीन-पाकिस्तान सीमाओं पर बदले सैन्य कमांडर, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया
- मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी खास टेक्नोलॉजी पर होगा फोकस
नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। भारत ने चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर अपने सैन्य कमांडर बदल दिए हैं। पाकिस्तान बॉर्डर को कवर करने वाली वेस्टर्न कमांड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने संभाली है। इसी तरह चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रखवाली करने वाली ईस्टर्न कमांड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने संभाल ली है। दोनों सेना कमांडरों की नियुक्तियों से सेना मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी खास टेक्नोलॉजी को शामिल करने, इंटेलिजेंस से चलने वाले ऑपरेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस करना जारी रखेगी।
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह अभी तक वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे। उन्होंने आज वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर कमान संभाली है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार की जगह ली है, जो 31 मार्च को रिटायर हुए थे। पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह को दिसंबर 1987 में पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) की चौथी बटालियन में कमीशन मिला था। वे देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी और लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। जनरल ऑफिसर ने चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में वेस्टर्न कमांड वॉर मेमोरियल पर बहादुरों को श्रद्धांजलि दी और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।
लगभग चार दशकों के करियर में जनरल ऑफिसर ने कई तरह के कमांड और स्टाफ नियुक्तियां संभाली हैं। उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर ऊंचाई वाले और संवेदनशील ऑपरेशनल सेक्टर में फॉर्मेशन को कमांड किया है। उनके ऑपरेशनल अनुभव में ऑपरेशन पवन में हिस्सा लेना, साथ ही नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकवाद विरोधी अभियान में कई बार काम करना शामिल है। उन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक परिचालन रसद के तौर पर काम किया, जहां उन्होंने परिचालन गतिशीलता, रसद एकीकरण और निरंतरता क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को कवर करने वाली पूर्वी कमान में लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी की जगह ली है, जो 31 मार्च को रिटायर हुए थे। सेना में 11 जून 1988 को कमीशन हुए लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन लगभग चार दशकों का सैन्य अनुभव लेकर आए हैं। उनके करियर में देश के कुछ सबसे मुश्किल ऑपरेशनल माहौल में कमांड, स्टाफ और निर्देशात्मक नियुक्तियों की बड़ी रेंज शामिल है।
जनरल ऑफिसर ने सियाचिन के उच्च ऊंचाई वाले इलाके में एक इन्फैंट्री बटालियन और एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली है। उन्होंने एक इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर भी काम किया है और बाद में एलीट ब्रह्मास्त्र कोर की कमान संभाली है। रणनीतिक और संस्थागत डोमेन में उन्होंने रक्षा मंत्रालय (सेना) का एकीकृत मुख्यालय में महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी और लंदन में हाई कमीशन ऑफ इंडिया में डिफेंस अटैची के तौर पर काम किया है।
सेना की पूर्वी कमान संभालने से पहले उन्होंने सैन्य मुख्यालय में क्वार्टर मास्टर जनरल के तौर पर काम किया, जहां उन्होंने आपूर्ति शृखला प्रबंधन और बुनियादी ढांचा में जरूरी सुधारों का नेतृत्व किया, जिससे परिचालन निरंतरता और पूरी लड़ाई की तैयारी में काफी बढ़ोतरी हुई। लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन के पास कर्नल ऑफ द डोगरा रेजिमेंट और डोगरा स्काउट्स के प्रतिष्ठित पद भी हैं। काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल के कमांडेंट के तौर पर उनके कार्यकाल ने स्पेशल ट्रेनिंग और डॉक्ट्रिनल डेवलपमेंट में ऊंचे बेंचमार्क सेट किए।कमांड संभालने पर आर्मी कमांडर ने शहीद बहादुरों को श्रद्धांजलि दी और ईस्टर्न कमांड के सभी रैंक के लोगों से ऑपरेशनल तैयारी के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने को कहा।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम

