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सनातन विवाद पर अन्नामलै का उदयनिधि स्टालिन पर हमला

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सनातन विवाद पर अन्नामलै का उदयनिधि स्टालिन पर हमला


चेन्नई, 15 मई (हि.स.)। तमिलनाडु की राजनीति में सनातन धर्म को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म संबंधी बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता के. अन्नामलै ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो रहा है।

दरअसल, उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में कहा था कि लोगों को बांटने वाला सनातन समाप्त किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और हिंदू संगठनों की ओर से कड़ी आलोचना सामने आई थी। भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू धर्म के खिलाफ बताया, जबकि द्रमुक नेताओं ने इसे सामाजिक समानता के संदर्भ में दिया गया बयान बताया।

इसी बीच, द्रविड़ आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेता के. वीरमणि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू धर्म अलग-अलग नहीं हैं। इस वीडियो को साझा करते हुए के. अन्नामलै ने एक्स पर द्रमुक और उदयनिधि स्टालिन पर निशाना साधा।

अन्नामलै ने अपने पोस्ट में लिखा कि द्रमुक नेता बार-बार पुराने और घिसे-पिटे स्पष्टीकरण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके “वैचारिक गुरु” पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि सनातन धर्म और हिंदू धर्म अलग नहीं हैं। अन्नामलै ने सवाल उठाया कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उधयनिधि ने खुले तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि सनातन हिंदू धर्म को समाप्त करना चाहिए।

उन्होंने तंज कसते हुए आगे लिखा, “आप तो बहुत बहादुर इंसान हैं ना? अपने गुरु को भी साथ ले जा सकते थे। क्या उस समय गाड़ी में जगह नहीं थी?” अन्नामलै की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

इस विवाद के बीच उदयनिधि स्टालिन ने पहले भी अपने बयान पर सफाई दी थी। उन्होंने एक्स पर कहा था कि उन्होंने केवल उस सनातन व्यवस्था का विरोध किया है, जो समाज में लोगों को जाति और भेदभाव के आधार पर बांटती है। उन्होंने कहा कि वह आलोचनाओं से डरने वाले नहीं हैं और द्रविड़ आंदोलन हमेशा विरोध के बीच आगे बढ़ा है।

उदयनिधि ने अपने बयान में कहा था, “तमिलनाडु विधानसभा में मैंने कहा था कि लोगों को बांटने वाला सनातन निश्चित रूप से समाप्त होना चाहिए। कुछ लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं, लेकिन मैं ऐसी आलोचनाओं से डरने वाला नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन विरोध के बीच ही विकसित हुआ है।”

अब अन्नामलै की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। भाजपा और द्रमुक के बीच वैचारिक टकराव को लेकर राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV