सीमा सुरक्षा को मिलेगा हाईटेक कवच, छह माह में लगने शुरू होंगे ड्रोन रोधी संयंत्र
- सीमा से सटे 50 किमी क्षेत्र की हर गतिविधि पर रखनी होगी नजर : अमित शाह
बीकानेर, 26 मई (हि.स.)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को भारत-पाक सीमा पर स्थित बीएसएफ की ऐतिहासिक सांचू पोस्ट का दौरा किया। प्रहरी सम्मेलन में उन्हाेंने कहा कि केंद्र सरकार अगले छह महीने में सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन रोधी संयंत्र लगाने की शुरुआत करेगी। उन्होंने कहा कि अब केवल सीमा पर निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि ड्रोन को जमीन पर कौन रिसीव कर रहा है और उसके जरिए भेजे गए हथियार, नारकोटिक्स या अन्य सामग्री का उपयोग कौन कर रहा है। ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।
अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ की परंपरागत ड्यूटी को अब नए आयाम से देखने की आवश्यकता है। अभी तक सीमाओं की सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और तस्करी पर निगरानी प्रमुख जिम्मेदारी रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में सीमावर्ती क्षेत्रों की आंतरिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि सीमा से सटे 50 किलोमीटर क्षेत्र में यदि कोई अवैध निर्माण होता है या गांवों में असामान्य जनसंख्या परिवर्तन दिखाई देता है, तो इसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन और सरकार को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने के निर्णय के पीछे भी यही सोच थी कि केवल सीमा चौकियों की सुरक्षा से देश सुरक्षित नहीं हो सकता। राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगातार समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि ड्रोन और आधुनिक उपकरणों के जरिए हथियारों और नारकोटिक्स की तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन चुकी है। सरकार तकनीक और खुफिया तंत्र दोनों स्तरों पर इसे रोकने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल ड्रोन को मार गिराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क को समाप्त करना अधिक जरूरी है। अमित शाह ने कहा कि सीमांत गांवों का विकास वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। बीएसएफ को सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों और युवाओं के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी सीमा सुरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सके। उन्होंने कहा कि बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और स्थानीय प्रशासन मिलकर ही मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार कर सकते हैं। इन चारों के समन्वय के बिना पूरी तरह सुरक्षित सीमा की कल्पना नहीं की जा सकती।
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश की सुरक्षा नीति में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। सेना का तेजी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है और आतंकवाद तथा सीमा पार गतिविधियों के प्रति भारत की नीति पहले से अधिक आक्रामक और स्पष्ट हुई है। उन्होंने कहा कि केवल हमले के बाद जवाब देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति बनानी होगी कि दुश्मन भारत के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोशिश करने का साहस ही न कर सके।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने बीएसएफ जवानों की सराहना की और कहा कि जवानों ने कठिन परिस्थितियों में मोर्चा संभालते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया तथा पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के जवान हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गृह मंत्री ने सांचू पोस्ट के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बनने से पहले से ही उनके मन में सांचू चौकी को देखने की इच्छा थी। वर्ष 1964 के भारत-पाक संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तान ने सांचू पर कब्जा करने की कोशिश की थी। तब 3 आरएसी और 13 ग्रेनेडियर के जवानों ने जवाबी हमला कर सांचू को भारत की सीमा में सुरक्षित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि जवानों के साहस और बलिदान के कारण यह ऐतिहासिक चौकी आज भी देश की सुरक्षा का मजबूत प्रतीक बनी हुई है।
अमित शाह ने कहा कि राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में 1096 किलोमीटर लंबी लेटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्सील रोड का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। ये सड़कें बीएसएफ जवानों की आवाजाही और सीमा क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करेंगी। इसके साथ ही नई डिजाइन की फेंसिंग लगाने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की 180 सीमा चौकियों तक पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंचाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा की है। जवानों ने 45 डिग्री तापमान से लेकर माइनस 45 डिग्री तक हर मौसम में कर्तव्य निभाया है। उन्होंने बताया कि बीएसएफ के दो हजार से अधिक जवान देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं।
महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि अब सीमा सुरक्षा में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। पहले यह सवाल उठाए जाते थे कि महिलाएं सीमा सुरक्षा में क्या भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन आज देश की बेटियां हर जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक महिला जवानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कर दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान में महिला जवानों के लिए 79 बैरकों को स्वीकृति दी गई है, जिन पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें से 67 बैरकों का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि 12 बैरकों पर कार्य जारी है। मंगलवार को 14 महिला बैरकों का लोकार्पण भी किया गया।
अमित शाह ने इस दौरान सांचू पोस्ट परिसर में खेजड़ी का पौधा भी लगाया। उन्होंने कहा कि खेजड़ी पूरे रेगिस्तान के लिए कल्पवृक्ष के समान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में शुरू किए गए पौधरोपण अभियान के तहत सुरक्षा बलों के जवान अब तक 7 करोड़ 35 लाख पौधे लगा चुके हैं।
इस दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

