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श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में पहुंची छड़ी मुबारक यात्रा, खास पूजा सम्पन्न

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श्रीनगर, 12 अगस्त (हि.स.)। वार्षिक अमरनाथ यात्रा का आखिरी चरण पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गया है। भगवान शिव की पवित्र चांदी की गदा 'छड़ी मुबारक' को खास पूजा के लिए आज श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर ले जाया गया। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में पूजा सालाना यात्रा से जुड़ी पुरानी परंपराओं के तहत की गई। इन रस्मों के दौरान वैदिक मंत्रों का जाप, प्रार्थनाएं और भक्ति-भाव वाले कार्यक्रम हुए जिनमें साधुओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यात्रा के आखिरी चरण में छड़ी मुबारक को पारंपरिक रूप से इसके संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ले जाते हैं।

यह पवित्र गदा पारंपरिक रास्ते से अमरनाथ गुफा मंदिर की ओर जाएगी, जहां आखिरी पूजा और दर्शन के साथ यात्रा संपन्न होगी। इन रस्मों में जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लोगों की शांति, समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना की जाती है। अमरनाथ यात्रा में छड़ी मुबारक का खास धार्मिक महत्व है और इसकी आखिरी यात्रा को सालाना यात्रा का आध्यात्मिक समापन माना जाता है।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच शंकराचार्य मंदिर में 'अमरनाथ छड़ी मुबारक' की पूजा सम्पन्न होने के साथ ही अब 22 अगस्त को श्रीनगर से पहलगाम के लिए रवाना होगी। इस साल छड़ी मुबारक की अंतिम पूजा 28 अगस्त को अमरनाथ गुफा में की जाएगी।

श्रीनगर के दशनामी अखाड़े में स्थित शिव मंदिर में पवित्र अमरनाथ गुफा जाने वाली छड़ी मुबारक की पूजा हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों के बीच की गई। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गुफा ले जाने से पहले शंकराचार्य मंदिर में छड़ी मुबारक की पूजा की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महंत और साधु शामिल हुए।

छड़ी मुबारक पूजा का बड़ा महत्व है। अमरनाथ यात्रा पारंपरिक रूप से छड़ी मुबारक की शुरुआती पूजा के साथ ही शुरू होती है। इस पवित्र छड़ी को कश्मीर के कई मंदिरों में ले जाया जाता है जहां इसकी पूजा की जाती है। अमरनाथ गुफा में अंतिम समारोह पूरा होने के बाद पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे अंतिम अनुष्ठान के साथ यह यात्रा संपन्न होती है।

22 अगस्त को छड़ी मुबारक को श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से कश्मीर के कई मंदिरों से होते हुए पहलगाम ले जाया जाएगा। परंपरा के अनुसार 22 और 23 अगस्त को पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद यह यात्रा 24 अगस्त को चंदनवाड़ी और 25 अगस्त को शेषनाग पहुंचेगी। पंचतरणी में दो रात (26 और 27 अगस्त) रुकने के बाद यह 28 अगस्त को पवित्र गुफा पहुंचेगी, जहां अंतिम अनुष्ठान के साथ इस साल की अमरनाथ यात्रा का समापन होगा। इसके बाद छड़ी मुबारक को वापस दशनामी अखाड़े लाया जाता है जहां इसे अगले साल तक रखा जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह