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डीएलआई योजना से समर्थित स्टार्टअप ने स्वदेशी वीईजीए प्रोसेसर पर बनाया ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’

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डीएलआई योजना से समर्थित स्टार्टअप ने स्वदेशी वीईजीए प्रोसेसर पर बनाया ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’


नई दिल्ली, 15 अगस्त (हि.स.)। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना से समर्थित चेन्नई की सेमीकंडक्टर स्टार्टअप अहीसा डिजिटल इनोवेशंस ने स्वदेशी वीईजीए माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित ‘विहान’ नाम का ब्रॉडबैंड चिप विकसित किया है। कंपनी ने स्वतंत्रता दिवस पर इस चिप की पहली सिलिकॉन सफलता हासिल की है। अब कंपनी इसे उत्पादन के लिए तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी और 2027 में प्रोडक्शन टेप-आउट का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने बताया कि ‘विहान’ फाइबर ब्रॉडबैंड के लिए तैयार किया गया नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) है। इसका उद्देश्य भारत के घरों तक फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए जरूरी स्वदेशी तकनीक उपलब्ध कराना है।

अहीसा डिजिटल इनोवेशंस एक फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है, जो ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग और सुरक्षा के लिए चिप डिजाइन करती है। कंपनी ने गणतंत्र दिवस पर ‘विहान’ का टेप-आउट किया था और स्वतंत्रता दिवस पर इसके पहले प्रयास में सिलिकॉन सफलता हासिल की।

कंपनी को निवेशकों का भी समर्थन मिला है। इस साल की शुरुआत में अहीसा ने तमिलनाडु इंफ्रास्ट्रक्चर फंड मैनेजमेंट कॉरपोरेशन (टीएनआईएफएमसी) के तमिलनाडु इमर्जिंग सेक्टर सीड फंड और अन्य निजी निवेशकों से करीब 40 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस राशि का इस्तेमाल उत्पाद विकास और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनी के विस्तार के लिए किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन पूरे सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे कुल मूल्यवर्धन में 50 प्रतिशत तक योगदान हो सकता है और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिल ऑफ मैटेरियल्स (बीओएम) लागत में इसका हिस्सा करीब 15 से 35 प्रतिशत तक होता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार डीएलआई योजना के जरिए भारतीय स्टार्टअप को विभिन्न रणनीतिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए चिप डिजाइन करने में सहायता दे रही है। इनमें सैटेलाइट संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरे, रक्षा और एयरोस्पेस सिस्टम, ऑटोमोटिव, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एआई सिस्टम, दूरसंचार उपकरण और स्मार्ट मीटर शामिल हैं।

डीएलआई योजना के तहत सहायता पाने वाली कंपनियों ने अब तक 30 से अधिक चिप डिजाइन टेप-आउट किए हैं और 10 करोड़ डॉलर से अधिक का वेंचर कैपिटल निवेश जुटाया है। वहीं, चिप डिजाइन के लिए अत्याधुनिक उपकरण 455 संस्थानों को उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें 350 शैक्षणिक संस्थान और 105 स्टार्टअप शामिल हैं।

‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत भी 71 शैक्षणिक संस्थानों ने 245 चिप डिजाइन का टेप-आउट किया है। इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य की कुशल कार्यबल तैयार करना है।

मंत्रालय ने डीएलआई योजना के तहत हाल के कुछ अन्य सफलताओं का भी उल्लेख किया है। इनमें वर्वसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स का स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित बीएलडीसी मोटर कंट्रोलर चिप, नेत्रासेमी का 12 नैनोमीटर विजन एसओसी, ऑप्टोएमएल का 12 नैनोमीटर कंप्यूट-इन-मेमोरी एसओसी और इंडीसेमीसी का ब्लूटूथ बीएलई 6 चिप मॉड्यूल शामिल हैं।

उसका लक्ष्य केवल अलग-अलग चिप डिजाइन करना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण, एडवांस पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन तक पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करना है। जुलाई 2026 में 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी गई है।

अहीसा जैसी कंपनियों की उपलब्धियां दिखाती हैं कि भारत में डिजाइन किए जा रहे चिप अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। इनका निर्माण, परीक्षण और सत्यापन किया जा रहा है तथा इन्हें ग्राहक परीक्षण और बड़े पैमाने पर उत्पादन की दिशा में ले जाया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर