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’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा

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’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा


’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा


’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा


’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा


’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा


’ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुभारंभ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह बोले- एआई मंथन देगा विश्व को नई दिशा


- अपने देश, अपनी भाषाओं एवं अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप एआई मॉडल विकसित करेंः आशीष चाैहान - 26 देशों के 180 विद्यार्थियों और देश-विदेश के विशेषज्ञों की अध्यक्षता में हाे रहा यह दाे दिवसीय आयाेजन- एआई हमारा सहायक है, स्वामी नहींः राजीव प्रकाश

गोरखपुर, 27 मार्च (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रकल्प विश्व छात्र एवं युवा संगठन, मेटा एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय ‘ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्लुएंस 2026’ का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रदेश के उद्यान मंत्री मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारत की संस्कृति ‘विश्व कल्याण’ की भावना से प्रेरित है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए हम अपनी विरासत और मूल्यों को साथ लेकर चलें।

गोरखपुर विश्वविद्यालय के महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ में आयोजित उद्घाटन समारोह के शुभारंभ में विश्व छात्र एवं युवा संगठन के अध्यक्ष डॉ. नितिन ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि दिनेश प्रताप सिंह ने आगे कहा कि ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्लुएंस 2026 केवल एक तकनीकी आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर विचारों के मंथन का एक सशक्त मंच है, जहां 26 देशों से आए 180 से अधिक प्रतिभागी वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार कर रहे हैं। जिस प्रकार सतयुग में समुद्र मंथन से मानवता के लिए अमूल्य रत्न प्राप्त हुए थे, उसी प्रकार इस आधुनिक ज्ञान मंथन से भी विश्व के कल्याण हेतु नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे।

उन्हाेंने कहा कि आज रामनवमी के पावन अवसर पर भगवान श्री राम के आदर्श हमें यह प्रेरणा देते हैं कि हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए प्रगति के पथ पर अग्रसर हों। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है, जहां आधुनिक तकनीकी विकास और सांस्कृतिक समृद्धि का संतुलन बनाए रखा जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे एआई के क्षेत्र में कार्य करते हुए मानवता के हित, नैतिक मूल्यों और वैश्विक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, ताकि यह मंथन विश्व को एक नई दिशा देने में सफल हो सके।

समारोह में विशिष्ट अतिथि अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार और समाज की दिशा निर्धारित करने वाली एक निर्णायक शक्ति बनती जा रही है। आने वाले समय में यदि कोई जानकारी एआई या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होगी, तो उसे अस्तित्वहीन मान लेने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है, इसलिए आवश्यक है कि हम केवल उपभोक्ता न बनकर अपने देश, अपनी भाषाओं और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप एआई मॉडल विकसित करें। अन्यथा वैश्विक स्तर पर कुछ बड़ी शक्तियाँ ही डेटा और ज्ञान पर नियंत्रण स्थापित कर लेंगी, जिससे डिजिटल संप्रभुता और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। चौहान ने कोविड-19 जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय केवल तकनीक नहीं, बल्कि समाज, परिवार और समुदाय की शक्ति ही सबसे अधिक प्रभावी सिद्ध होती है। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे एआई के क्षेत्र में नवाचार करते समय भारतीय संस्कृति, वसुधैव कुटुंबकम की भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक कल्याण को सर्वोपरि रखें, ताकि यह तकनीक मानवता के लिए एक सकारात्मक और समावेशी भविष्य का निर्माण कर सके।

आईआईटी भिलाई के निदेशक राजीव प्रकाश ने कहा कि मानव बुद्धिमत्ता को सदैव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से ऊपर रखना आवश्यक है, क्योंकि एआई हमारा सहायक है, स्वामी नहीं। हमने इस तकनीक का निर्माण किया है, इसलिए इसे हमारे जीवन को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि यह एक सक्षम उपकरण के रूप में हमारे निर्णयों को बेहतर बनाने में सहयोग करे।

दो दिवसीय 'ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस 2026' में 26 देशों के 180 विद्यार्थियों व देश विदेश के विशेषज्ञों की अध्यक्षता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के वर्तमान परिदृश्य, इसके तीव्र विस्तार, वैश्विक प्रभाव तथा भविष्य की असीम संभावनाओं पर गहन एवं व्यापक मंथन किया जाएगा। विभिन्न सत्रों के माध्यम से एआई के नवाचार, उभरती तकनीकों, शोध की नई दिशाओं तथा समाज एवं शिक्षा के क्षेत्र में इसके प्रभावी उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा होंगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महासचिव शुभम गोयल ने किया। कार्यक्रम में अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री बालकृष्ण, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. सुषमा पांडेय, निखिता रेड्डी, यशोराज पांडेय एवं अभाविप के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय