पिछले एक साल में 4515 बच्चों को लिया गया गोद, 12 सालों में सबसे अधिक

नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। देश में पिछले एक साल में यानि वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 4,515 बच्चों को गोद लिया गया। यह संख्या 2015-16 के बाद से अब तक की सबसे अधिक है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने 8,598 नए पहचाने गए बच्चों को गोद लेने वाले पूल में शामिल किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि जरूरतमंद बच्चों को प्यार करने वाले परिवार मिलें। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने गोद लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकारों के समन्वय में 245 नई गोद लेने वाली एजेंसियां स्थापित की गईं।
इस प्रगति में व्यापक प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान ने अहम भूमिका निभाई।
मंगलवार को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कारा ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यक्रम आयोजित किए, साथ ही 45 वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए, जिसमें गोद लेने की समयसीमा, सीडब्ल्यूसी सदस्यों का प्रशिक्षण, पालन-पोषण की देखभाल और बच्चों और संभावित दत्तक माता-पिता के लिए गोद लेने संबंधी परामर्श शामिल थे। इसके अलावा, गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान के हिस्से के रूप में, कारा ने अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 तक दत्तक माता-पिता के साथ बैठकें आयोजित करने के लिए 16 राज्यों के साथ भागीदारी की। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की उपस्थिति में नवंबर 2024 में वार्षिक सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें पालन-पोषण की देखभाल और गोद लेने की वकालत पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें 500 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 01 सितंबर 2022 से बच्चों की देखभाल और गोद लेने से संबंधित मुद्दों पर जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका बढ़ाने से संबंधित संशोधित कानून लागू हो गया है। इसका मतलब है कि अब स्थानीय कोर्ट के बजाय जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) बच्चा गोद लेने के आदेश दे सकता है।
दरअसल सरकार ने बच्चों की देखभाल और न्याय संबंधी संशोधन विधेयक, 2021 को पिछले साल बजट सत्र के दौरान संसद में पेश किया था और इसे मॉनसून सत्र में पारित किया गया। संसद से पारित होने के बाद, राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही यह अधिनियम एक सितंबर से लागू हो गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी