दिव्यांगजनों के साथ 15 सदस्यीय दल का समावेशी हिमालय अभियान कल से, पांच हजार मीटर की ऊंचाई को करेंगे पार
नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। अगर हौसला हो तो सारी मुश्किलें छोटी लगने लगती हैं। यह लाइन छह दिव्यांगजनों के लिए मुफीद है, जो कल से हिमालय ट्रेकिंग पर निकलेंगे। 15 सदस्यों का एक दल समावेशी एवरेस्ट बेस कैंप के लिए रवाना होगा। समावेशन और सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम उठाते हुए यह ट्रेक टिंकेश एबिलिटी फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रतिभागी 5,300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण रास्तों को पार करेंगे,जो उनकी दृढ़ता, साहस और एकता का प्रतीक होगा।
इस अभियान में शामिल हो रहीं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पर्वतारोही छोनजिन आंगमो ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दृष्टि खोने जैसी कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने ऊंचाइयों को छूने का साहस मन में जगाया। इसके लिए पर्वत चढ़ने जैसा जोखिम भरे क्षेत्र को अपनाया और कई पर्वत पर चढ़ कर नए रिकॉर्ड भी स्थापित किए। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, और इस सफर में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग को भी सराहा।
इस अभियान का नेतृत्व कर रहे टिंकेश कौशिक है जिन्होंनेे ट्रिपल एम्प्यूटी के बावजूद एक मल्टी-एडवेंचर स्पोर्ट्स चैंपियन हैं। टिंकेश ने 9 साल की उम्र में करंट लगने से अपने दोनों पैर और एक हाथ खो दिया था। हरियाणा के मूल निवासी, 30 वर्षीय टिंकेश माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाले दुनिया के पहले ट्रिपल एम्प्यूटी हैं और एक लाइफ कोच के रूप में फिटनेस के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अभियान में ललित यादव और नीलेय पाटिल भी शामिल हैं, जिन्होंने सफलता के लिए समर्पण, सुव्यवस्थित योजना और प्रायोजन की अहम भूमिका पर जोर दिया। सिडेनस्ट्रिका गौतम ने समावेशन, पहुंच और “पर्पल इकोनॉमी” की अवधारणा को रेखांकित किया।
पिछले अन्नपूर्णा बेस कैंप अभियान की सफलता के बाद, यह पहल समावेशी एडवेंचर में नए मानक स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। सही सोच और समर्थन के साथ कोई भी शिखर अजेय नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

