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ईसीआई का बड़ा फैसला, विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में मतदान केंद्रों पर मिलेंगी खास सुविधाएं

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ईसीआई का बड़ा फैसला, विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में मतदान केंद्रों पर मिलेंगी खास सुविधाएं


नई दिल्ली, 22 मार्च (हि.स.)। चुनाव आयोग ने मतदाताओं के अनुभव को सुखद और सुगम बनाने के लिए 'न्यूनतम सुविधाएं' (एएमएफ) और 'मतदाता सहायता' को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं।

चुनावी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कुल 2,18,807 मतदान केंद्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों।

आयोग ने मतदान केंद्रों पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। इनमें मतदान सुविधा केंद्र (एएमएफ) में पीने का पानी, छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र, पानी की सुविधा वाला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेतक शामिल हैं।

मतदान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाएं ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।

इसके अलावा मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार एकसमान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (वीएफपी) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, मान्य पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।

इस बार चुनावों में तकनीक और सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाता सहायता बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे जिनमें बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और कर्मचारियों की एक टीम होगी जो मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान बूथ नंबर और क्रम संख्या ढूंढने में सहायता करेगी। वीएबी पर प्रमुख संकेत होंगे और मतदान परिसर में पहुंचते ही मतदाताओं को आसानी से दिखाई देंगे।

मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कई कदमों में से एक यह है कि मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाताओं के लिए मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मतदाता केंद्र में प्रवेश करने से पहले अपना फोन (बंद करके) एक नामित स्वयंसेवक को सौंप सकते हैं और मतदान के बाद उसे वापस ले सकते हैं।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये सभी उपाय अनिवार्य हैं और इनका कड़ाई से पालन होना चाहिए। सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मतदान की तारीखों से पहले ही इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लें ताकि मतदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी