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वैभव संगोपन योजना से मुंबई की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षण

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मुंबई, 29 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं की विरासत को संरक्षित कर उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए विशेष पहल की है। वैभव संगोपन योजना के अंतर्गत आरपीजी फाउंडेशन ने शिवड़ी किले को संरक्षण के लिए गोद लिया है। इसी तर्ज पर बाणगंगा, वरली किले और कोलीवाड़ा का भी जतन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सहयोग से यह पहल की गई है। सांस्कृतिक कार्य विभाग की वैभव संगोपन योजना को गति दी गई है। ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण, स्थानीय संस्कृति के दस्तावेजीकरण, नागरिक सुविधाओं में सुधार और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार सृजन जैसे विभिन्न पहलुओं के माध्यम से मुंबई की विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। आरपीजी फाउंडेशन की पहल ‘द हेरिटेज प्रोजेक्ट’ के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है और 270 से अधिक महिलाओं को आजीविका तथा उद्यमिता के लिए सहयोग प्रदान किया गया है। मुंबई के पूर्वी तट पर स्थित ऐतिहासिक शिवड़ी किला शहर के समुद्री इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किले के ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित करने और उसे नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आरपीजी फाउंडेशन ने इसे संरक्षण के लिए गोद लिया है। यहां संग्रहालय और सूचना केंद्र विकसित करने की योजना है।

योजना के माध्यम से वरली किले के संरक्षण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। वरली कोलीवाड़ा में विरासत संरक्षण के कार्यों का विस्तार किले तक करने का लक्ष्य है। कोली समुदाय के इतिहास, परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित कर इस विरासत को अधिकाधिक नागरिकों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। वरली कोलीवाड़ा में 71 से अधिक स्ट्रीट लाइटें, 30 से अधिक सूचना पट्ट और सात से अधिक सार्वजनिक दीवार चित्र स्थापित किए गए हैं। वरली कोलीवाड़ा की 120 से अधिक महिलाओं को कौशल विकास और उद्यमिता के लिए सहयोग प्रदान किया गया है। ‘शेफ्स ऑफ कोलीवाड़ा’ पहल के माध्यम से महिलाओं ने पारंपरिक कोली खानपान संस्कृति को नई पहचान दिलाई है। विभिन्न खाद्य महोत्सवों और प्रदर्शनियों में भागीदारी से महिलाओं को अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय परंपराओं के संरक्षण के साथ रोजगार सृजन में भी योगदान मिल रहा है।

ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब परिसर में विरासत संरक्षण के साथ इस स्थल के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को नागरिकों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत 150 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता, सिलाई और स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। विभिन्न कार्यक्रमों और अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से 500 से अधिक पर्यटकों को भी इस विरासत स्थल से जोड़ा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार