वाहन ट्रांसफर और एनओसी के लिए आधार ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया
मुंबई, 24 अगस्त (हि.स.)। वाहन मालिकाना हस्तांतरण और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) के लिए पूरे देश में एक जैसा व स्टैंडर्ड ऑनलाइन कार्यप्रणाली लागू की गई है। इन सेवाओं के लिए आवेदक का आधार ऑथेंटिकेशन प्रोसेस अनिवार्य किया गया है।
भारत सरकार के सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट सेवाओं को एक जैसे तथा स्टैंडर्ड तरीके से लागू करने के हिसाब से ओनरशिप ट्रांसफर और एनओसी सेवा के लिए एक बदली हुई कार्य प्रणाली की है। इस कार्य प्रणाली को संबंधित अथॉरिटी ने मंजूरी दे दी है। सेवाएं उसी हिसाब से प्रोसेस की जा रही हैं। अगर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) पर नाम और आधार कार्ड पर नाम में कोई अंतर है, तो गाड़ी के सिस्टम में एक मैसेज आता है, जिसमें लिखा होता है, “पिन कोड अपडेट करने के लिए कृपया आधार सेंटर जाएं या कॉन्टैक्टलेस सेवाओं का फ़ायदा उठाने के लिए आरटीओ जाएं/मोबाइल ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके अप्लाई करें। गाड़ी और आधार में नाम मैच नहीं कर रहा है। इसलिए, गाड़ी मालिकों को अपने आधार कार्ड पर नाम को गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर दिए गए नाम के हिसाब से ठीक करवाना होगा। नाम में गड़बड़ी ठीक होने के बाद, वाहन-4.0 सिस्टम में जरूरी सुधार करके आधार ऑथेंटिकेशन प्रोसेस पूरा करना होगा। उसके बाद ही गाड़ी के मालिकाना हक के ट्रांसफर या एनओसी के लिए अप्लाई करना होगा।
गाड़ी के सिस्टम में ये बदलाव पूरे देश में लागू किए गए हैं। जॉइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (आईटी) शैलेश कामत के अनुसार वाहन से जुड़ी अलग-अलग ऑनलाइन सर्विस का आसानी से और बिना कॉन्टैक्ट के फ़ायदा उठाने के लिए, गाड़ी मालिकों को आधार कार्ड पर अपना नाम, पता व मोबाइल नंबर अपडेट कर लेना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

