माघी गणेश विसर्जन में पर्यावरण की उपेक्षा क्यों,डॉ प्रशांत
मुंबई,18 जनवरी ( हि.स.) । ठाणे महानगर पालिका क्षेत्र मे माघी गणेशोत्सव के मौके पर पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा एक बार उभरकर फिर सामने आया है, और पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत रवींद्र सिनकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से माघी गणेशोत्सव के लिए अलग से एनवायरनमेंट-फ्रेंडली उपाय लागू करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आम गणेशोत्सव की तरह ही माघी गणेशोत्सव में भी पर्यावरण अनुकूल संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हालांकि पूरे राज्य में माघी गणेशोत्सव बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है, लेकिन इस दौरान विसर्जन सिस्टम की कमी बहुत महसूस होती है। पब्लिक गणेशोत्सव के दौरान कृत्रिम तालाब, लोहे की टंकियां और मिट्टी की मूर्तियों के लिए बढ़ावा दिया जाता है और बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाई जाती है। हालांकि, विडंबना यह है कि माघी गणेशोत्सव के दौरान ऐसा कोई ठोस सिस्टम न होने की वजह से ऐसी तस्वीर सामने आती है कि कई जगहों पर गणेश मूर्तियों को सीधे प्राकृतिक पानी के श्रोतों में विसर्जित कर दिया जाता है। इसकी वजह से नदियों, झीलों और समुद्री इलाकों में पानी का प्रदूषण बढ़ रहा है और इसका बायोडायवर्सिटी और पानी के इकोसिस्टम पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस संकट से बचना पूरी तरह मुमकिन है, और इसके लिए प्रशासन को पहल करके प्लान किए गए उपायों को लागू करने की ज़रूरत है, डॉ. सिनकर ने अपनी राय दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिए गए एक बयान में, डॉ. सिनकर ने माघी गणेशोत्सव के लिए एक अलग आर्टिफिशियल विसर्जन झील बनाने, लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट बॉडीज़ को साफ और ज़रूरी निर्देश देने और इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों के इस्तेमाल के लिए एक इंसेंटिव स्कीम लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने नागरिकों में पर्यावरण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए बिलबोर्ड, अपील और जानकारी कैंपेन लागू करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पर्यावरण से जुड़े फैसलों को लेकर हमेशा संजीदा रुख अपनाया है। इसलिए, उम्मीद है कि माघी गणेशोत्सव के लिए एक अलग इको-फ्रेंडली पॉलिसी( पर्यावरण अनुकूल नीति ) की घोषणा की जाएगी।
ठाणे के पर्यावरणविद प्रशांत रवींद्र सिनकर का कहना है कि “पर्यावरण बचाना सिर्फ़ एक त्योहार की बात नहीं है, बल्कि यह हर किसी की लाइफस्टाइल का ज़रूरी हिस्सा बनना चाहिए। अगर माघी गणेशोत्सव के दौरान भी इको-फ्रेंडली पॉलिसी को सख्ती से लागू किया जाए, तो प्रदूषण कंट्रोल होगा; साथ ही, पर्यावरण बचाने का एक पॉजिटिव और प्रेरणा देने वाला मैसेज समाज तक पहुंचेगा,”।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

