ठाणे में स्थाई कृत्रिम गणेश विसर्जन बनाए जाएं
मुंबई,23 अगस्त ( हि.स.) ।ठाणे में हर साल गणेश विसर्जन के लिए किए जाने वाले अस्थाई इंतजामों की जगह अब स्थाई पर्यावरणाकुल (इको-फ्रेंडली फैसिलिटी) व्यवस्था बनाने की मांग सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री चीफ सचिवालय ने मुंबई ठाणे के पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिंकर की मुहिम पर ध्यान दिया है और इसे आगे की कार्रवाई के लिए शहर विकास विभाग (अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट) को भेज दिया है।
ठाणे मनपा हर साल अलग-अलग जगहों पर कृत्रिम विसर्जन तालाब बनाता है। हालांकि यह इंतज़ाम पर्यावरण के नज़रिए से ज़रूरी है, लेकिन तालाब बनाने, उसमें पानी भरने, मैनपावर, मशीनरी, सफाई और विसर्जन के बाद डिस्पोज़ल पर हर साल बहुत ज़्यादा खर्च होता है। इसलिए, हर साल टेम्पररी खर्च करने के बजाय एक बार एक काबिल परमानेंट फैसिलिटी बनाना ज़्यादा इकोनॉमिकली फायदेमंद हो सकता है, डॉ. सिनकर ने तर्क दिया है।
अगर ठाणे के मसुदा तलवपाली के दत्ता घाट की तरह ठाणे बे एरिया और शहर की बड़ी झीलों में स्थायी कृत्रिम विसर्जन तालाब बनाए जाएं, तो भक्तों के लिए सुरक्षित और इको-फ्रेंडली फैसिलिटी दी जा सकती हैं। साथ ही, पानी के कुदरती सोर्स में होने वाले प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है।
साथ ही इन स्थाई केंद्र सेंटर में निर्मल इकट्ठा करने, विसर्जन के लिए अलग सिस्टम, पानी की निकासी, सफ़ाई और रेगुलर मेंटेनेंस की सुविधा होनी चाहिए। इससे गणेशोत्सव खत्म होने के बाद कृत्रिम तालाबों को हटाने, पानी निकालने और इलाके को ठीक करने का एक्स्ट्रा खर्च भी कम हो सकता है।
अगर एक बार अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर कई सालों तक इस्तेमाल किया जाए, तो हर साल दोहराने का खर्च बचाया जा सकता है। इस बचत का इस्तेमाल भविष्य में दूसरे नागरिक और पर्यावरण के कामों के लिए किया जा सकता है। इसलिए, इस प्रपोज़ल पर सिर्फ़ धार्मिक या पर्यावरण के नज़रिए से ही नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता के नज़रिए से भी विचार करने की ज़रूरत है।
ठाणे के पर्यावरणविद प्रशांत रवीन्द्र सिनकर ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अनुरोध किया है कि -हर साल टेम्पररी सिस्टम बनाने के बजाय गणेश विसर्जन के लिए एक बार साइंटिफिक रूप से सही और काबिल परमानेंट सुविधा बनाना ज़्यादा मुमकिन है। इससे न सिर्फ़ कुदरती पानी के सोर्स बचेंगे बल्कि बार-बार होने वाला खर्च भी कम होगा। यह ठाणे के लिए एक लंबे समय का इन्वेस्टमेंट हो सकता है जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

