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टोरेंट पावर प्रोजेक्ट के पर्यावरण अनुमतियों में गड़बड़ी- असीम सरोदे

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मुंबई, 26 अक्टूबर (हि.स.)। रायगढ़ जिले के कर्जत स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर इलाके में प्रस्तावित टोरेंट कंपनी की जलविद्युत परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। वरिष्ट वकील असीम सरोदे ने परियोजना के लिए दी गई पर्यावरण अनुमतियों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पर्यावरण अनुमतियों में गड़बड़ियां हैं.

सरोदे के अनुसार मुख्यमंत्री का यह बयान कि प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग और पर्यावरण अनुमतियां 18 महीने में कानूनी प्रोसेस पूरा करके लिए गए थे, यह झूठी कहानी' है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए अनुमति प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां और गैर-कानूनी बातें हैं। सरोदे ने कहा कि टोरेंट परियोजना भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर से 20 किलोमीटर और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से 15.53 किलोमीटर दूर बताई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि पूरी परियोजना इको-सेंसिटिव जोन से बाहर है। लेकिन दूरी और क्षेत्र की सीमाओं का हवाला देकर परियोजना के पर्यावरणीय असर को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

सरोदे ने आरोप लगाया कि स्थल निरीक्षण, खर्च-लाभ विश्लेषण, पर्यावरण अध्ययन, पर्यावरणीय आघाक, जन सुनवाई और विशेषज्ञ समितियों द्वारा जांच के प्रक्रिया में अनियमितता की गई है। उन्होंने कहा कि कई आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक न करके जानकारी छिपाने की कोशिश की गई है। चार महीने पहले कुछ लोग उनके पास टोरेंट परियोजना पर आपत्तियां लेकर आए थे। लेकिन पूरे दस्तावेज न होने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में प्रक्रिया से जुड़े सवालों के कारण आगे कोई कदम नहीं उठाया जा सका।

सरोदे ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि वे केवल टोरेंट परियोजना के महत्व के बारे में बात करने के बजाय, इलाके में दूसरे प्रोजेक्ट व नए प्रोजेक्ट की जरूरत और उनके मिले-जुले एनवायरनमेंटल असर पर अपनी स्थिति साफ करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार