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अंततः ठाणे में 27 विद्यार्थियों के पढ़ाई का साल बच गया

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मुंबई ,05 मार्च ( हि,. स.) । ठाणे शहर के कासरवडावली इलाके में मौजूद एक कॉलेज के छात्र ने एक साल तक पढ़ाई की, लेकिन उन्हें पता ही नहीं था कि उन्हें यूनिवर्सिटी से मान्यता नहीं मिली है। जब परीक्षा देने का समय आया, तो संबंधित महाविद्यालय ने विश्वविद्यालय से मान्यता के लिए ज़रूरी इंतज़ाम नहीं किए थे। , विधायक केलकर के अनुसार वे स्वयं वाइस-चांसलर से मिले। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने तुरंत इस पर ध्यान दिया और विद्यार्थियों को मान्यता देने के लिए एक कमिटी की बैठक की। इस वजह से ये विद्यार्थी परीक्षा दे सके और उनका शैक्षणिक साल बच गया।

मुंबई यूनिवर्सिटी ने 27 विद्यार्थियों के प्रवेश में देरी के कारण कासरवडावली में शिक्षा संस्थान के डिग्री कॉलेज पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया था। परीक्षा से एक दिन पहले जब यह मामला सामने आया, तो आम अभिभावक भी परेशान हो गए थे।

विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक, अगर 21 से 40 विद्यार्थियों के प्रवेश केस में कोई गलती पाई जाती है, तो कॉलेज पर हर विद्यार्थी की ट्यूशन फ़ीस का दोगुना और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगता है। साथ ही, अगले शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से कॉलेज की प्रवेश क्षमता 25 प्रतिशत कम की जाए और एक जांच समिती बनाई जाए। साथ ही, हर विद्यार्थी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए। यूनिवर्सिटी ने इस बारे में ज्ञान गंगा एजुकेशन इंस्टिट्यूट को एक लेटर भेजा है। हालांकि, इंस्टिट्यूट ने कहा कि यूनिवर्सिटी का एडमिशन लिंक बार-बार बंद होने की वजह से स्टूडेंट्स के एडमिशन में देरी हुई। जब तक स्टूडेंट्स लाखों का यह जुर्माना नहीं भरते, उनका एडमिशन लीगल नहीं होता।

ठाणे के विधायक संजय केलकर ने मुंबई यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मिस्टर भांबरे से मिलकर विद्यार्थियों के साथ हो रहे अन्याय के बारे में बताया था। विधायक केलकर ने कहा कि परीक्षा में बैठने से मना करने की वजह से इन स्टूडेंट्स का शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ गया था। उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन को भरोसा दिलाया कि वह खुद इस मामले को देखेंगे और पक्का करेंगे कि विद्यार्थियों के साथ कोई नाइंसाफी न हो। उस समय मौजूद विद्यार्थियों ने भी उपकुलपति के सामने अपनी बात रखी।

आखिरकार, इन विद्यार्थियों को सिर्फ Rs. 5,000 की लेट फीस देकर एग्जाम में बैठने की इजाज़त दी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा