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अंधेरी कामगार अस्पताल के काम की होगी जांच

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मुंबई, 19 अप्रैल (हि.स.)। अंधेरी (पूर्व) के मरोल स्थित कामगार अस्पताल के पुनर्निर्माण का मामला गरमा गया है। काम की निविदाओं में हुई फेरफार और लागत खर्च बढ़ने के मसले की उच्च स्तरीय जांच होगी। इस सबंध में केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मरोल इलाके में श्रमिकों के लिए वर्ष 1985 में करीब 10.74 एकड़ में फैला यह अस्पताल स्थापित किया गया था। वर्ष 2008 में यह अस्पताल केंद्र सरकार को सौंप दिया गया था। इस अस्पताल में वर्ष 2018 में भीषण आग लग गई थी, जिसके कारण अस्पताल बंद कर दिया गया था। इसके पुनर्निर्माण की योजना बनाई गई थी। इस बीच याचिका दायर होने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस अस्पताल को 15 अगस्त 2025 तक निर्माण कार्य पूरा करने और 31 जनवरी 2026 तक अस्पताल को पूरी तरह चालू करने का निर्देश दिया था। लेकिन अभी तक इसका काम पूरा नहीं हो सका है। कई कामगार स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। इस मामले को लेकर मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट के सांसद रवींद्र वायकर ने केंद्रीय मंत्री मांडविया से ज्ञापन सौंपकर शिकायत की है. उन्होंने काम में घोटाले का आरोप लगाया है। केंद्रीय मंत्री मंडाविया ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कामगार अस्पताल के दोबारा बनने में हो रही देरी और घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने का निर्देश दिया है।

सांसद वायकर ने बताया कि करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद, लगभग 15 वर्षों से चल रही अस्पताल की जीर्णोद्धार परियोजना अभी भी लटकी हुई है। कई टेंडर में बदलाव किए जाने से परियोजना की लागत बढ़कर 254 करोड़ रुपये हो गई है। अस्पताल का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कुछ संरचनात्मक खामियों के कारण भी अस्पताल के संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. इस संबंध में केंद्रीय मंत्री मांडविया ने जांच के आदेश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार